DELHI SIR में 47.62 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर रह सकते हैं। 24 अगस्त को लिस्ट आएगी, 23 सितंबर तक दावा-आपत्ति का मौका मिलेगा।
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी DELHI SIR को लेकर अब सबसे बड़ा अपडेट सामने आया है। 24 अगस्त 2026 को जारी होने वाली ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से करीब 47.62 लाख मतदाताओं के नाम बाहर रह सकते हैं। दिल्ली में करीब 1.45 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं, लेकिन अब तक लगभग 97.47 लाख मतदाताओं के गणना प्रपत्र जमा और डिजिटाइज किए गए हैं।
आंकड़ा सामने आने के बाद राजधानी की चुनावी राजनीति से लेकर आम मतदाताओं तक हलचल तेज हो गई है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में क्यों नहीं दिखाई देंगे? क्या इन सभी लोगों के वोट का अधिकार खत्म हो जाएगा? या फिर दावा और आपत्ति की प्रक्रिया के बाद तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी?
यहां सबसे जरूरी बात समझना जरूरी है कि DELHI SIR के तहत 24 अगस्त को जारी होने वाली सूची ड्राफ्ट वोटर लिस्ट होगी। ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि मतदाता का नाम स्थायी रूप से काट दिया गया है। पात्र मतदाताओं को अपना दावा पेश करने का पूरा मौका मिलेगा।

24 अगस्त को जारी होगी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट
दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत घर-घर जाकर मतदाताओं से गणना प्रपत्र जमा कराने की प्रक्रिया 17 अगस्त को समाप्त हुई। इसके बाद चुनाव विभाग ने प्राप्त प्रपत्रों के आधार पर आंकड़ों को तैयार किया।
अब 24 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होगी। इस सूची में उन मतदाताओं के नाम शामिल होंगे जिनके गणना प्रपत्र प्राप्त हुए हैं और जिनकी जानकारी निर्धारित प्रक्रिया के तहत दर्ज की गई है।
जिन मतदाताओं के फॉर्म जमा नहीं हुए, जिनका सत्यापन नहीं हो सका या जो अलग-अलग कारणों से उपलब्ध नहीं मिले, उनके नाम फिलहाल ड्राफ्ट सूची में नहीं दिखाई दे सकते हैं।
यही वजह है कि DELHI SIR को लेकर 24 अगस्त की तारीख बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उस दिन पहली बार साफ तस्वीर सामने आएगी कि किन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में हैं और किनके नाम फिलहाल बाहर हैं।
DELHI SIR 2026 – Election Commission Voter Portal
47.62 लाख का आंकड़ा क्यों बना चर्चा का विषय?
दिल्ली में करीब 1.45 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं। इनमें से लगभग 97.47 लाख गणना प्रपत्र जमा किए गए हैं। इस हिसाब से करीब 47.62 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हो पाने की स्थिति बन रही है।
इतना बड़ा आंकड़ा सामने आने के बाद DELHI SIR को लेकर चर्चा स्वाभाविक रूप से तेज हो गई है। चुनाव में एक-एक वोट महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में लाखों मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर रहने की संभावना को सामान्य घटना नहीं माना जा सकता।
हालांकि इस आंकड़े को समझने में सावधानी जरूरी है। इन 47.62 लाख लोगों को सीधे अपात्र मतदाता मानना सही नहीं होगा। इस संख्या में कई तरह की श्रेणियां शामिल हो सकती हैं।
कुछ मतदाता अपना पता बदल चुके हो सकते हैं। कुछ लोगों की मृत्यु हो चुकी हो सकती है। कुछ रिकॉर्ड डुप्लीकेट हो सकते हैं। कुछ लोगों से संपर्क नहीं हो पाया होगा और कुछ मामलों में गणना प्रपत्र जमा नहीं हुआ होगा।
इसलिए अभी यह कहना कि 47.62 लाख लोगों के वोट हमेशा के लिए खत्म हो गए हैं, सही नहीं होगा।
70 में से 47 विधानसभा सीटों पर बड़ा असर
दिल्ली की कुल 70 विधानसभा सीटों में से करीब 47 सीटों पर 30 से 40 प्रतिशत या उससे ज्यादा मतदाताओं के ड्राफ्ट सूची से बाहर रहने की स्थिति बताई जा रही है।
कुछ विधानसभा क्षेत्रों में यह आंकड़ा 40 प्रतिशत से भी ऊपर पहुंच रहा है। इसका मतलब यह है कि DELHI SIR का असर राजधानी के कई विधानसभा क्षेत्रों में काफी बड़ा दिखाई दे सकता है।
हालांकि हर सीट की स्थिति एक जैसी नहीं है। कहीं गणना प्रपत्र जमा होने का प्रतिशत ज्यादा है तो कहीं कम। कुछ विधानसभा क्षेत्रों में डिजिटाइजेशन का काम काफी आगे है, जबकि कुछ क्षेत्रों में बड़ी संख्या में फॉर्म अलग-अलग कारणों से उपलब्ध नहीं हो पाए।
यही वजह है कि पूरी दिल्ली की तस्वीर को एक ही नजर से देखना सही नहीं होगा। विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़े देखने पर स्थिति ज्यादा स्पष्ट होती है।

तुगलकाबाद में करीब 48 प्रतिशत नाम बाहर रहने की संभावना
तुगलकाबाद विधानसभा क्षेत्र का आंकड़ा खास तौर पर ध्यान खींच रहा है। यहां करीब 48 प्रतिशत मतदाताओं के ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर रहने की संभावना बताई जा रही है।
अगर ड्राफ्ट सूची में यही स्थिति दिखाई देती है तो यह निश्चित तौर पर बड़ा आंकड़ा होगा। यहां मतदाताओं के लिए 24 अगस्त के बाद अपने नाम की स्थिति जांचना बेहद जरूरी होगा।
DELHI SIR के तहत तुगलकाबाद में डिजिटाइजेशन का अनुपात भी दूसरे कुछ विधानसभा क्षेत्रों की तुलना में कम बताया गया है। ऐसे में दावा और आपत्ति की प्रक्रिया के दौरान यहां बड़ी संख्या में आवेदन आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
लेकिन अंतिम स्थिति तभी सामने आएगी जब दावा और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होगी।
ओखला में भी करीब 45 प्रतिशत फॉर्म का मामला
ओखला विधानसभा क्षेत्र भी इस पूरी प्रक्रिया में चर्चा में है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यहां करीब 45 प्रतिशत मतदाताओं के फॉर्म ‘uncollectable’ श्रेणी में बताए गए हैं।
यह शब्द अपने आप में काफी महत्वपूर्ण है। ‘Uncollectable’ का मतलब सीधे यह नहीं है कि संबंधित मतदाता फर्जी है या अपात्र है। इसका अर्थ अलग-अलग परिस्थितियों से जुड़ा हो सकता है।
किसी मतदाता का पता बदल जाना, घर बंद मिलना, संबंधित व्यक्ति का उपलब्ध नहीं होना या फॉर्म से जुड़ी अन्य स्थिति इसके पीछे कारण हो सकती है।
इसलिए DELHI SIR में ‘uncollectable’ आंकड़े को लेकर भी अंतिम निष्कर्ष ड्राफ्ट और उसके बाद की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकाला जाना चाहिए।

रोहिणी और शकूरबस्ती की तस्वीर अलग
दूसरी तरफ रोहिणी और शकूरबस्ती जैसे विधानसभा क्षेत्रों में गणना प्रपत्रों के डिजिटाइजेशन का अनुपात 80 प्रतिशत से ज्यादा बताया गया है।
रोहिणी में यह अनुपात करीब 83 प्रतिशत और शकूरबस्ती में 81 प्रतिशत से ज्यादा बताया गया है। इसका मतलब है कि इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मतदाताओं की जानकारी प्रक्रिया के तहत दर्ज की गई है।
फिर भी इसका अर्थ यह नहीं है कि इन क्षेत्रों में किसी का नाम बाहर नहीं होगा। अंतिम तस्वीर ड्राफ्ट सूची आने के बाद ही साफ होगी।
यानी DELHI SIR का असर हर विधानसभा क्षेत्र में अलग-अलग दिखाई दे सकता है। एक क्षेत्र के आंकड़े के आधार पर पूरी दिल्ली की स्थिति तय करना सही नहीं होगा।
नई दिल्ली सीट पर भी नजर
नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक यहां करीब 41 प्रतिशत से ज्यादा मतदाताओं के ड्राफ्ट सूची से बाहर रहने की स्थिति बताई जा रही है।
यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र राजधानी के सबसे चर्चित राजनीतिक क्षेत्रों में से एक है।
यहां 24 अगस्त को ड्राफ्ट सूची आने के बाद मतदाता अपने नाम की स्थिति जरूर देखना चाहेंगे। यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम सूची में नहीं मिलता है तो उसे दावा दाखिल करने की प्रक्रिया अपनानी होगी।
इसी वजह से DELHI SIR की ड्राफ्ट सूची सिर्फ प्रशासनिक दस्तावेज नहीं होगी, बल्कि लाखों मतदाताओं के लिए यह जांचने का मौका भी होगी कि उनका नाम रिकॉर्ड में किस स्थिति में है।
आरके पुरम और मालवीय नगर में भी बड़ा आंकड़ा
आरके पुरम में भी बड़ी संख्या में मतदाताओं के ड्राफ्ट सूची से बाहर रहने की संभावना सामने आई है। इसी तरह मालवीय नगर और ग्रेटर कैलाश जैसे क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय संख्या सामने आई है।
इससे यह साफ होता है कि यह मामला सिर्फ किसी एक इलाके तक सीमित नहीं है।
DELHI SIR के आंकड़ों को देखें तो दिल्ली के अलग-अलग सामाजिक और भौगोलिक क्षेत्रों में इसका असर दिखाई दे रहा है। इसलिए इस प्रक्रिया को किसी एक वर्ग या किसी एक क्षेत्र से जोड़कर देखना पूरी तस्वीर नहीं बताएगा।
सबसे जरूरी बात यही है कि हर पात्र मतदाता अपने नाम की स्थिति खुद जांचे।
क्या ड्राफ्ट से नाम बाहर होने पर वोट खत्म हो जाएगा?
नहीं। यही बात मतदाताओं को सबसे पहले समझनी चाहिए।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट अंतिम मतदाता सूची नहीं होती। यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है तो उसे निर्धारित समय के भीतर दावा दाखिल करने का अधिकार मिलेगा।
यानी DELHI SIR के दौरान ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं मिलना चिंता की बात हो सकती है, लेकिन इसे अंतिम फैसला मान लेना गलत होगा।
मतदाता को पहले अपना नाम और स्थिति जांचनी चाहिए। इसके बाद अगर वह पात्र है और उसका नाम नहीं है तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करना चाहिए।
24 अगस्त से 23 सितंबर तक दावा-आपत्ति
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के साथ ही मतदाताओं के लिए अगला महत्वपूर्ण चरण शुरू होगा।
24 अगस्त से 23 सितंबर 2026 तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी। इस अवधि में जिन पात्र मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं, वे अपना नाम शामिल कराने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं।
यही चरण DELHI SIR में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। क्योंकि इसी दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाता अपनी स्थिति सुधारने या नाम वापस जुड़वाने के लिए सामने आ सकते हैं।
मतदाताओं को अंतिम तारीख का इंतजार नहीं करना चाहिए। अगर नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं मिलता है तो समय रहते संबंधित प्रक्रिया की जानकारी लेकर दावा दाखिल करना बेहतर होगा।
27 अक्टूबर को आएगी अंतिम सूची
दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अधिकारियों की ओर से आवेदनों की जांच की जाएगी।
इसके बाद 27 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जानी है।
इस तारीख के बाद ही यह ज्यादा स्पष्ट होगा कि शुरुआती चरण में बाहर बताए जा रहे 47.62 लाख नामों में से कितने नाम वास्तव में अंतिम सूची से बाहर रहे और कितने नाम दावा-आपत्ति के बाद वापस शामिल किए गए।
यानी DELHI SIR की असली तस्वीर 24 अगस्त को पूरी तरह सामने नहीं आएगी। 24 अगस्त एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन अंतिम फैसला 27 अक्टूबर की सूची से ज्यादा स्पष्ट होगा।
कौन-कौन से नाम बाहर रह सकते हैं?
मतदाता सूची के पुनरीक्षण में कई तरह के रिकॉर्ड सामने आते हैं। ऐसे मतदाता जो अपने पुराने पते से कहीं और चले गए हैं, मृत मतदाता, डुप्लीकेट रिकॉर्ड या ऐसे मतदाता जिनसे संपर्क नहीं हो सका, वे अलग श्रेणियों में आ सकते हैं।
इसी तरह कुछ लोगों के गणना प्रपत्र समय पर जमा नहीं हो पाए होंगे।
इसलिए DELHI SIR के तहत बाहर रहने वाले हर नाम को एक ही नजर से देखना ठीक नहीं होगा।
किसी व्यक्ति का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है तो उसकी वास्तविक स्थिति दावा-आपत्ति और सत्यापन की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
मतदाताओं को अभी क्या करना चाहिए?
सबसे पहले 24 अगस्त को ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद अपना नाम जांचें।
अगर नाम मौजूद है तो नाम, पता और दूसरे जरूरी विवरण भी ध्यान से देखें। किसी गलती की स्थिति में उसे समय रहते सुधारने की कोशिश करें।
अगर नाम नहीं है तो यह पता करें कि उसका नाम किस कारण से ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हुआ।
इसके बाद पात्र होने पर दावा दाखिल करें। वोटर लिस्ट में अपना नाम चेक करें
DELHI SIR के दौरान मतदाताओं के लिए सबसे जरूरी चीज जागरूक रहना है। केवल किसी राजनीतिक बयान या सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर यह मान लेना कि नाम हमेशा के लिए कट गया है, सही नहीं होगा।
BLO की भूमिका भी अहम
इस पूरी प्रक्रिया में बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। घर-घर जाकर गणना प्रपत्र उपलब्ध कराना, जानकारी जुटाना और संबंधित रिकॉर्ड को प्रक्रिया में शामिल करना इसी व्यवस्था का हिस्सा है।
दुर्गम इलाकों, बंद घरों या बदले हुए पतों की वजह से कई बार मतदाता तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
यही वजह है कि DELHI SIR में सामने आए बड़े आंकड़ों को समझते समय मैदानी परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
अंतिम सूची से पहले दावे और आपत्तियों के जरिए गलतियां सुधारने का अवसर इसी कारण महत्वपूर्ण है।
राजनीतिक बहस भी तेज
करीब 47.62 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर रहने की संभावित स्थिति सामने आने के बाद राजनीतिक चर्चा भी तेज होना स्वाभाविक है।
विपक्षी दल इस आंकड़े को लेकर सवाल उठा सकते हैं। वहीं चुनाव व्यवस्था से जुड़े अधिकारी इसे मतदाता सूची को अपडेट करने और रिकॉर्ड की जांच की प्रक्रिया के रूप में देखेंगे।
लेकिन DELHI SIR पर राजनीतिक बहस के बीच सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति आम मतदाता है।
किसी भी दल का बयान सुनने से पहले मतदाता को अपना नाम खुद जांचना चाहिए। अगर नाम मौजूद नहीं है तो तय प्रक्रिया के तहत दावा दाखिल करना चाहिए।
क्या इससे चुनावी समीकरण बदलेंगे?
अभी इस सवाल का जवाब देना जल्दबाजी होगी।
47.62 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं होने की स्थिति निश्चित रूप से बड़ा आंकड़ा है, लेकिन दावा और आपत्ति के बाद यह संख्या बदल सकती है।
इसलिए DELHI SIR के आधार पर अभी किसी विधानसभा क्षेत्र का चुनावी समीकरण बदलने का दावा करना उचित नहीं होगा।
अंतिम मतदाता सूची सामने आने के बाद ही यह पता चलेगा कि कितने मतदाता वास्तव में सूची से बाहर रहे।
फिलहाल सबसे बड़ा काम मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित करना है।
सबसे बड़ा सवाल—क्या कोई पात्र मतदाता छूट तो नहीं जाएगा?
मतदाता सूची को अपडेट करना जरूरी है। मृत लोगों के नाम हटाना, स्थान बदल चुके मतदाताओं के रिकॉर्ड को अपडेट करना और डुप्लीकेट रिकॉर्ड की पहचान करना चुनावी प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है।
लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि कोई पात्र और जीवित मतदाता केवल फॉर्म जमा न होने या सत्यापन में परेशानी के कारण सूची से बाहर न रह जाए।
यही संतुलन DELHI SIR की सफलता की सबसे बड़ी कसौटी होगी।
अगर प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची ज्यादा साफ और सटीक बनती है तो यह चुनावी व्यवस्था के लिए सकारात्मक कदम होगा। लेकिन अगर पात्र मतदाताओं को नाम जुड़वाने के लिए अनावश्यक परेशानी होती है तो सवाल भी उठेंगे।
47.62 लाख नामों की कहानी अभी अधूरी है
अभी जो आंकड़ा सामने आया है, वह पूरी कहानी नहीं है।
47.62 लाख नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर रहने की स्थिति में हैं, लेकिन इस संख्या में अलग-अलग कारणों से जुड़े मतदाता शामिल हो सकते हैं।
24 अगस्त को ड्राफ्ट सूची आने के बाद तस्वीर थोड़ी साफ होगी। इसके बाद 23 सितंबर तक दावा-आपत्ति की प्रक्रिया चलेगी।
फिर अधिकारियों की जांच होगी और अंत में 27 अक्टूबर को अंतिम सूची सामने आएगी।
यानी DELHI SIR की पूरी प्रक्रिया को एक तारीख या एक आंकड़े से समझना सही नहीं होगा।
24 अगस्त क्यों है सबसे अहम?
24 अगस्त को पहली बार आम मतदाता यह देख सकेगा कि गणना प्रक्रिया के बाद उसका नाम ड्राफ्ट सूची में है या नहीं।
यही वजह है कि इस दिन के बाद मतदाताओं को सक्रिय होना होगा।
अगर नाम मौजूद है तो ठीक। अगर नहीं है तो दावा करने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी।
DELHI SIR में मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी इसलिए भी जरूरी है क्योंकि कोई भी प्रशासनिक प्रक्रिया तभी सफल हो सकती है जब संबंधित व्यक्ति अपने रिकॉर्ड की जांच करे और गलती होने पर उसे सुधारने की कोशिश करे।
अंतिम फैसला 27 अक्टूबर को
ड्राफ्ट सूची पर होने वाले दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम तस्वीर सामने आएगी।
27 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित होने वाली अंतिम मतदाता सूची बताएगी कि शुरुआती चरण में बाहर रहने वाले कितने नाम वापस शामिल हुए और कितने रिकॉर्ड अंतिम रूप से बाहर रहे।
इसलिए DELHI SIR को लेकर अभी सबसे जरूरी बात यही है कि 24 अगस्त की सूची को अंतिम सूची न समझा जाए।
ड्राफ्ट सूची एक महत्वपूर्ण चरण है, लेकिन अंतिम फैसला बाद में होगा।
मतदाताओं के लिए 5 जरूरी बातें
पहली बात: 24 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होगी।
दूसरी बात: ड्राफ्ट सूची से नाम बाहर होने का मतलब स्थायी रूप से नाम कटना नहीं है।
तीसरी बात: 24 अगस्त से 23 सितंबर तक दावा और आपत्ति का मौका मिलेगा।
चौथी बात: पात्र मतदाता को अपना नाम नहीं मिलने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा करना चाहिए।
पांचवीं बात: 27 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी।
इन पांच बातों को ध्यान में रखकर DELHI SIR की प्रक्रिया को समझना आसान होगा।
वोट का अधिकार और जिम्मेदारी दोनों जरूरी
मतदाता सूची लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक है। सूची में नाम होने पर ही कोई पात्र नागरिक चुनाव में अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकता है।
इसलिए DELHI SIR के दौरान एक तरफ गलत और पुराने रिकॉर्ड को हटाना जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है।
यही कारण है कि ड्राफ्ट सूची के बाद दावा और आपत्ति की प्रक्रिया को बेहद गंभीरता से देखना होगा।
मतदाता भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए समय पर अपना नाम जांचें और जरूरत पड़ने पर दावा दाखिल करें।
अब नजर 24 अगस्त पर
दिल्ली में 24 अगस्त को जारी होने वाली ड्राफ्ट वोटर लिस्ट कई सवालों का पहला जवाब देगी। करीब 47.62 लाख मतदाताओं के नाम फिलहाल बाहर रहने की स्थिति ने राजधानी में बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
लेकिन इस कहानी का अंतिम अध्याय अभी बाकी है।
DELHI SIR की ड्राफ्ट सूची के बाद दावा और आपत्ति की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद अधिकारियों की जांच होगी और 27 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची सामने आएगी।
इसलिए फिलहाल सबसे जरूरी बात यह है कि मतदाता घबराएं नहीं, बल्कि जागरूक रहें।
अपना नाम जांचें। नाम नहीं मिले तो कारण पता करें। पात्र हैं तो दावा दाखिल करें और निर्धारित समय सीमा का ध्यान रखें।
आखिरकार DELHI SIR का अंतिम उद्देश्य तभी सफल माना जाएगा, जब मतदाता सूची साफ-सुथरी होने के साथ-साथ हर पात्र मतदाता का नाम भी उसमें सुरक्षित रहे।
