NEET पेपर लीक प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट ने हाई पावर कमेटी बनाई। पुलिस कार्रवाई, हिंसा और छात्रों की FIR पर कोर्ट ने बड़ा संकेत दिया है।
नई दिल्ली। NEET पेपर लीक प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने पूरे मामले की जांच के लिए हाई-पावर्ड कमेटी गठित करने का फैसला किया है। साथ ही छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर भी राहत के संकेत दिए हैं। नीट पेपर लीक विवाद में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: GEN-Z ने सरकार को झुकाया
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को संविधान के आर्टिकल 142 के तहत रद्द करने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि हत्या, रेप और अपहरण जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों को अलग रखा जाएगा।
पूरा मामला क्या है — NEET पेपर लीक प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
देशभर की मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-यूजी में पेपर लीक के आरोपों के बाद जो आक्रोश फैला, वह आगे चलकर एक बड़े जन-आंदोलन में तब्दील हो गया। छात्रों, अभिभावकों और कई सामाजिक-राजनीतिक संगठनों ने राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े पैमाने पर धरना-प्रदर्शन किया। यही NEET पेपर लीक प्रदर्शन आगे चलकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की वजह बना. कई जगह लाठीचार्ज हुआ, सैकड़ों छात्रों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज हुईं, और दूसरी तरफ़ पुलिसकर्मियों के साथ भी हिंसा की घटनाएं सामने आईं। महीनों बाद अब यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुंच चुका है, जहां मंगलवार को इससे जुड़ी कई याचिकाओं पर अहम सुनवाई हुई।

यह सिर्फ़ एक परीक्षा प्रणाली की गड़बड़ी का मामला नहीं रह गया — NEET पेपर लीक प्रदर्शन धीरे-धीरे छात्र अधिकारों, पुलिस बल के इस्तेमाल की सीमाओं, और लोकतांत्रिक असहमति जताने के अधिकार जैसे बड़े सवालों से जुड़ गया है। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने इसे सिर्फ़ एक क़ानूनी विवाद की तरह नहीं, बल्कि संस्थागत जवाबदेही के मसले की तरह लिया है।
NEET पेपर लीक प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला: हाई-पावर्ड कमेटी का गठन
NEET पेपर लीक प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाइयों और पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ हिंसा, दोनों पहलुओं की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक स्वतंत्र, हाई-पावर्ड कमेटी बनाने का फ़ैसला किया है। साथ ही कोर्ट ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग करने वाले छात्रों के ख़िलाफ़ दर्ज एफ़आईआर रद्द करने की मंशा भी ज़ाहिर की है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस पर सुनवाई की। Awami League: 1 हसीना की वापसी से क्या फिर बदलेगा बांग्लादेश का सियासी खेल?
वहीं कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज एफ़आईआर के मामले में सरकार की नीयत साफ़ नहीं है — पार्टी का कहना है कि कोर्ट में सहमति और ज़मीन पर कार्रवाई में साफ़ फ़र्क़ दिख रहा है। NEET पेपर लीक प्रदर्शन को लेकर यह टकराव अब सिर्फ़ छात्रों और सरकार के बीच नहीं, बल्कि अदालत की निगरानी में एक संस्थागत प्रक्रिया का रूप ले चुका है।

कमेटी में कौन-कौन शामिल होगा
NEET पेपर लीक प्रदर्शन से जुड़े हर मुद्दे की तह तक जाने के लिए बनने वाली इस कमेटी में तीन तरह के लोग शामिल किए जा सकते हैं — सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज, किसी हाई कोर्ट के एक पूर्व जज, और डीजीपी रैंक का एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, यह हाई-पावर्ड पैनल एक फ़ैक्ट-फ़ाइंडिंग बॉडी की तरह काम करेगा, यानी इसका मुख्य काम तथ्यों की पड़ताल करना होगा, न कि सीधे सज़ा तय करना।
बेंच ने साफ़ किया कि कमेटी को हर ज़रूरी संसाधन और इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराया जाएगा। कोर्ट को भरोसा है कि जो भी पीड़ित कमेटी के पास पहुंचेगा, उसे तुरंत सुनवाई का मौक़ा मिलेगा। यह कमेटी सिर्फ़ पुलिस बल प्रयोग तक सीमित नहीं रहेगी l यह महिला प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ यौन हिंसा, ऑनलाइन उत्पीड़न, और सोशल मीडिया के ज़रिए अन्य कमज़ोर वर्गों को निशाना बनाए जाने के आरोपों की भी जांच करेगी। इस तरह NEET पेपर लीक प्रदर्शन से जुड़ी हर शिकायत को एक ही मंच के तहत समेटने की कोशिश की जा रही है।
NEET पेपर लीक प्रदर्शन : जस्टिस सूर्यकांत की सख़्त टिप्पणी और गोपनीय नाम
NEET पेपर लीक प्रदर्शन में हुई ज़्यादतियों को लेकर जस्टिस सूर्यकांत का रुख़ बेहद कड़ा रहा। उनके मुताबिक़ ज़िम्मेदार लोगों के पास कोई बहाना नहीं हो सकता, और इस मामले को गंभीरता से लेकर तार्किक अंजाम तक पहुंचाना ज़रूरी है. इसीलिए यह हाई-पावर्ड कमेटी बनाई जा रही है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि सीबीआई के एक पूर्व महानिदेशक कमेटी में शामिल होने के लिए तैयार हो गए हैं — यह एक प्रतिष्ठित अधिकारी हैं जो कुछ साल पहले रिटायर हुए थे। इसके अलावा किसी राज्य के एक पूर्व पुलिस महानिदेशक की सहमति भी ली जा चुकी है, जिनका इस मामले से सीधा कोई नाता नहीं है।
जस्टिस सूर्यकांत ने बताया कि जान-बूझकर दो विकल्प खुले रखे गए ताकि भविष्य में किसी सीबीआई अधिकारी की मौजूदगी पर सवाल न उठे। नाम सार्वजनिक न करने की वजह यह बताई गई कि अधिकारियों को अनावश्यक विवाद से बचाया जा सके। कोर्ट ने पक्षकारों से यह भी पूछा कि इन दोनों विकल्पों में से किसे प्राथमिकता दी जाए, या यह निर्णय अदालत पर छोड़ा जाए।
आर्टिकल 142 क्या है ? सरल भाषा में समझें
NEET पेपर लीक प्रदर्शन को लेकर छात्रों पर दर्ज एफ़आईआर रद्द करने का रास्ता कोर्ट ने भारतीय संविधान के आर्टिकल 142 में तलाशा है। सरल शब्दों में समझें तो यह अनुच्छेद सुप्रीम कोर्ट को असाधारण परिस्थितियों में “पूर्ण न्याय” सुनिश्चित करने के लिए विशेष शक्ति देता है — यानी जहां सामान्य क़ानूनी प्रक्रिया से न्याय मिलने में देरी या बाधा हो, वहां कोर्ट सीधे आदेश जारी कर सकता है। यह शक्ति आमतौर पर तब इस्तेमाल होती है जब मामला बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करता हो और सामान्य अदालती प्रक्रिया व्यावहारिक रूप से बहुत धीमी या जटिल साबित हो।
बार एंड बेंच के मुताबिक़, कोर्ट ने कहा कि वह इसी विशेष शक्ति का इस्तेमाल करते हुए छात्रों से जुड़ी एफ़आईआर रद्द करने पर विचार करेगा। हालांकि जिन लोगों की आपराधिक पृष्ठभूमि गंभीर है, उनके मामलों की अलग से समीक्षा हो सकती है। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी सैद्धांतिक रूप से इस बात पर सहमति जताई कि छात्र प्रदर्शनकारियों की एफ़आईआर रद्द होनी चाहिए, बशर्ते जिनका आपराधिक इतिहास रहा है उनकी अलग से जांच हो।
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया — Supreme Court of India
भारत सरकार का शिक्षा मंत्रालय — Ministry of Education
किन 2,873 लोगों को राहत नहीं मिलेगी ?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में बताया कि क़रीब 2,873 लोगों को छोड़कर बाक़ी सभी के ख़िलाफ़ मामले रद्द किए जा सकते हैं — यह वे लोग हैं जिनके ख़िलाफ़ हत्या, रेप और अपहरण जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े केस दर्ज हैं। इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने राज्य सरकारों से कहा कि वे सिर्फ़ छात्रों से जुड़ी एफ़आईआर की अलग सूची अदालत में जमा करें, ताकि उन्हें प्राथमिकता के आधार पर रद्द किया जा सके।
बेंच ने यह भी दोहराया कि कोर्ट की इस शक्ति को लेकर क़ानून पहले से स्पष्ट है, और आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों से जुड़ी एफ़आईआर के बारे में यह रुख़ पिछली सुनवाई में भी सही ठहराया जा चुका है।
कमेटी कैसे करेगी जांच ? प्रक्रिया को समझें
आमतौर पर ऐसी हाई-पावर्ड फ़ैक्ट-फ़ाइंडिंग कमेटियां पीड़ितों, गवाहों और प्रशासनिक अधिकारियों से बयान लेकर, सबूत जुटाकर और घटनास्थलों की समीक्षा करके अपनी रिपोर्ट तैयार करती हैं। इस मामले में भी कोर्ट ने संकेत दिया है कि कमेटी को समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट सौंपनी होगी, जिसके आधार पर अदालत आगे के निर्देश जारी करेगी।
इसका सीधा मतलब है कि NEET पेपर लीक प्रदर्शन से जुड़ा यह मामला एक बार में नहीं, बल्कि चरणबद्ध तरीक़े से आगे बढ़ेगा। कमेटी को न सिर्फ़ पुलिस बल प्रयोग की जांच करनी होगी, बल्कि यह भी देखना होगा कि प्रदर्शन के दौरान कौन-कौन से अधिकार कुचले गए और किन पीड़ितों को अब तक इंसाफ़ नहीं मिला। इस तरह की कमेटियां अक्सर पारदर्शिता बढ़ाने और भविष्य में पुलिस-प्रदर्शनकारी टकराव को कम करने के लिए दिशा-निर्देश भी सुझाती हैं।
सीजेपी का सरकार पर तीखा हमला
सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता कोर्ट में तो सहमति जता रहे हैं, लेकिन जब अदालत एफ़आईआर की सूची मांग रही है जिसे रद्द करना है, तो वह सूची पेश करने में आनाकानी हो रही है। उनके मुताबिक़ छात्रों के ख़िलाफ़ दर्ज मामले रद्द होने चाहिए, और यह किस तरह किया जाए यह फ़ैसला माननीय न्यायाधीशों पर छोड़ा जा सकता है — लेकिन साथ ही प्रदर्शन में घुसपैठ करने वाले असामाजिक तत्वों की भी अलग से जांच होनी चाहिए।

सौरव दास ने आगे कहा कि इस मुद्दे पर पहले भी सुनवाई हो चुकी है, पर स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे सरकार की नीयत पर सवाल उठते हैं। उनके अनुसार लगभग 2800 लोगों को अपराधी के तौर पर चिह्नित किया गया है, और उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई एक अलग विषय है — जबकि आम, शांतिपूर्ण छात्र-प्रदर्शनकारियों का मुद्दा पूरी तरह अलग है। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार अगर सिर्फ़ ज़ुबानी हामी भरकर असल कार्रवाई में देरी करती रही, तो यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सीजेपी का यह रुख़ बताता है कि NEET पेपर लीक प्रदर्शन का मुद्दा अब सिर्फ़ अदालती दायरे तक सीमित नहीं है, यह राजनीतिक जवाबदेही और सरकार की नीयत पर भरोसे का सवाल भी बन चुका है।
छात्रों और अभिभावकों के लिए इसका क्या मतलब है ?
जिन छात्रों और परिवारों ने NEET पेपर लीक प्रदर्शन में हिस्सा लिया और जिनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज हुई, उनके लिए यह सुनवाई राहत की उम्मीद लेकर आई है। अगर कोर्ट आर्टिकल 142 के तहत सामूहिक रूप से एफ़आईआर रद्द करने का आदेश देता है, तो इससे हज़ारों छात्रों को बड़ी क़ानूनी राहत मिल सकती है और उनके करियर व शैक्षणिक भविष्य पर पड़ने वाला असर टल सकता है। हालांकि जिनकी पहले से गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि है, उन्हें यह राहत मिलना मुश्किल है।
आगे क्या ! कब तक आएगा आदेश ?
सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ किया है कि अगर पक्षकार समय रहते कमेटी को लेकर अपने सुझाव सौंप देते हैं, तो बुधवार को ही औपचारिक आदेश जारी हो सकता है। जस्टिस सूर्यकांत के मुताबिक़, सुझाव मिलते ही कोर्ट अगले दिन आदेश पारित करने की स्थिति में होगा। इसलिए आने वाले कुछ दिनों में NEET पेपर लीक प्रदर्शन से जुड़ा यह मामला और स्पष्ट रूप ले सकता है।
