देश में चीनी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं और इसका असर अब सिर्फ चीनी तक सीमित नहीं रहा है। पिछले तीन महीनों में चीनी की कीमत करीब 40 फीसदी यानी 19 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गई है। इसी दौरान गुड़ के दाम 24 फीसदी, चावल कनकी 16 फीसदी और मक्के के आटे की कीमत करीब 11 फीसदी तक बढ़ी है। इडली रवा और राइस फ्लोर भी करीब 10.53 फीसदी महंगे हुए हैं। पशु आहार की कीमत में 10.34 फीसदी और पॉल्ट्री फीड में 8.70 फीसदी तक बढ़ोतरी बताई गई है।
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उपलब्ध जानकारी के अनुसार तीन महीने पहले चीनी करीब 48 रुपये किलो बिक रही थी, जबकि अब इसका भाव 67 रुपये किलो तक पहुंच गया है। यानी सीधे तौर पर 19 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। गुड़ 50 रुपये से बढ़कर 65 रुपये किलो हो गया है। चावल कनकी का भाव 25 रुपये से बढ़कर 29 रुपये किलो और मक्के का आटा 36 रुपये से बढ़कर 40 रुपये किलो बताया गया है।

इस बीच सरकार ने बढ़ते चीनी के दाम को काबू करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने गुरुवार को टैरिफ रेट कोटा यानी TRQ के तहत 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। इसके साथ ही हर महीने 10 टन से अधिक चीनी की खपत करने वाले थोक उपभोक्ताओं पर स्टॉक लिमिट लगाने का फैसला किया गया है। इसके तहत ऐसे थोक उपभोक्ता तय सीमा से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेंगे।
बाजार में बढ़ते चीनी के दाम की बड़ी वजह 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले 2026-27 सीजन में चीनी का ओपनिंग स्टॉक घरेलू खपत के लिए जरूरी 50 लाख टन से कम रहने का अनुमान बताया जा रहा है। वहीं, चीनी के उत्पादन को लेकर इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन यानी ISMA ने 2026-27 में गन्ने और चीनी उत्पादन का अनुमान भी जारी किया है।
इस पूरे मामले में एथेनॉल उत्पादन की भूमिका भी चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक एथेनॉल में 67 फीसदी मक्का, चावल की टुकड़ी और खराब अनाज का इस्तेमाल होता है, जबकि बाकी 33 फीसदी गन्ना और इसके उत्पादों से जुड़ा है। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन के अनुसार पिछले साल देश में 720 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन हुआ। इसके लिए करीब 1.33 करोड़ टन अनाज और 25 लाख टन चीनी बनाने लायक गन्ना-शीरा इस्तेमाल हुआ। जानकारी के अनुसार इसमें 34 लाख टन गन्ना शामिल था।
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इसी दौरान यह भी बताया गया है कि खराब अनाज से पहले पशु आहार और पॉल्ट्री फीड तैयार होता था। उपलब्धता कम होने से पशु आहार 8 से 10 फीसदी तक महंगा हुआ है। इसके असर से दूध और अंडे की कीमतों में भी 5 से 10 फीसदी तक बढ़ोतरी की जानकारी सामने आई है।
तीन महीने में 19 रुपये बढ़े चीनी के दाम
चीनी के दाम में पिछले तीन महीनों में आई तेजी का सीधा असर बाजार में दिखाई दे रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक तीन महीने पहले चीनी 48 रुपये प्रति किलो थी। अब यह 67 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। यानी तीन महीने में चीनी 19 रुपये प्रति किलो महंगी हुई है। प्रतिशत में देखें तो यह बढ़ोतरी 39.58 फीसदी है।
गुड़ की कीमत भी इसी अवधि में 50 रुपये से बढ़कर 65 रुपये प्रति किलो हो गई है। यानी गुड़ के भाव में 15 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। यह बढ़ोतरी 24 फीसदी बताई गई है।
चावल कनकी का भाव तीन महीने पहले 25 रुपये प्रति किलो था, जो अब 29 रुपये किलो बताया गया है। इसमें 4 रुपये प्रति किलो यानी 16 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। मक्के का आटा 36 रुपये से बढ़कर 40 रुपये किलो हो गया है। इसमें 4 रुपये यानी 11.11 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
इडली रवा और राइस फ्लोर का भाव 38 रुपये से बढ़कर 42 रुपये किलो बताया गया है। इसकी कीमत में 4 रुपये यानी 10.53 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इस तरह बढ़ते चीनी के दाम के साथ रसोई में इस्तेमाल होने वाली कई दूसरी चीजों के भाव में भी तेजी बताई जा रही है।
पशु आहार और पॉल्ट्री फीड भी महंगा
खाद्य बाजार में बढ़ते चीनी के दाम के साथ पशु आहार और पॉल्ट्री फीड की कीमतों में भी बढ़ोतरी सामने आई है। जानकारी के मुताबिक पशु आहार तीन महीने पहले 29 रुपये प्रति किलो था, जो अब 32 रुपये किलो बताया गया है। इसमें 3 रुपये यानी 10.34 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
पॉल्ट्री फीड की कीमत 23 रुपये से बढ़कर 25 रुपये किलो बताई गई है। यानी इसमें 2 रुपये यानी 8.70 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। जानकारी के अनुसार खराब अनाज का इस्तेमाल पहले पशु आहार और पॉल्ट्री फीड बनाने में होता था। अब इसकी उपलब्धता कम होने से पशु आहार की कीमत 8 से 10 फीसदी तक बढ़ने की बात कही गई है।

इसी के साथ दूध और अंडे की कीमतों पर भी असर पड़ने की जानकारी दी गई है। बताया गया है कि दूध और अंडे की कीमतों में 5 से 10 फीसदी तक बढ़ोतरी हो चुकी है।
इस तरह चीनी के दाम की बढ़ोतरी की चर्चा अब सिर्फ चीनी के बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि अनाज, पशु आहार और उससे जुड़े उत्पादों की कीमतों के साथ भी की जा रही है।
चीनी स्टॉक लिमिट और सरकारी आदेश — भारत सरकार, Department of Food & Public Distribution
Department of Food & Public Distribution – Sugar Updates
सरकार ने 10 लाख टन रॉ शुगर आयात की अनुमति दी
बढ़ते चीनी के दाम को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने गुरुवार को टैरिफ रेट कोटा के तहत 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। रॉ शुगर यानी कच्ची चीनी को आयात करके आगे की प्रक्रिया के बाद इसका इस्तेमाल घरेलू जरूरतों के लिए किया जा सकता है।
सरकार की ओर से इसके साथ थोक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक लिमिट का प्रावधान भी किया गया है। जानकारी के मुताबिक हर महीने 10 टन से ज्यादा चीनी की खपत करने वाले थोक उपभोक्ताओं पर स्टॉक लिमिट लगाई गई है। इसका मतलब यह है कि ऐसे बड़े उपभोक्ता जरूरत से ज्यादा चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेंगे।
बढ़ते चीनी के दाम के बीच सरकार के इन दोनों फैसलों को बाजार में उपलब्धता बनाए रखने और स्टॉक पर नियंत्रण से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में अलग-अलग पक्षों की ओर से चीनी की उपलब्धता और मौजूदा कीमतों को लेकर अलग-अलग बातें कही गई हैं।
2026-27 सीजन में ओपनिंग स्टॉक कम रहने का अनुमान
चीनी के दाम बढ़ने की एक बड़ी वजह 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले 2026-27 सीजन का ओपनिंग स्टॉक बताया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार घरेलू खपत के लिए जरूरी चीनी का ओपनिंग स्टॉक करीब 50 लाख टन से कम रहने का अनुमान है।
पिछले साल पेराई शुरू होने से पहले मिलों के पास करीब 47 लाख टन चीनी का ओपनिंग स्टॉक था। इस बार 2026-27 पेराई सीजन से पहले यह स्टॉक करीब 32 लाख टन बताया गया है। यानी पिछले साल की तुलना में इस बार मिलों के शुरुआती स्टॉक में करीब 15 लाख टन की कमी बताई गई है। यही अंतर बाजार में चीनी के दाम को लेकर चिंता की एक वजह के रूप में सामने आया है।
जानकारी के मुताबिक 2025-26 में करीब 25 लाख टन चीनी बनाने लायक गन्ना-शीरा एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल हुआ था। इसे भी ओपनिंग स्टॉक में कमी से जोड़कर बताया गया है।
गन्ने और चीनी उत्पादन का अनुमान कितना है?
एक तरफ चीनी के दाम में तेजी की खबर है, वहीं दूसरी तरफ 2026-27 सीजन में गन्ने और चीनी के उत्पादन को लेकर उत्पादन अधिक रहने का अनुमान भी सामने आया है।
इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन यानी ISMA के अनुसार 2026-27 में देश में गन्ने का कुल उत्पादन करीब 46.3 करोड़ टन रहने का अनुमान है। इसके साथ ही चीनी उत्पादन करीब 3.36 करोड़ टन रहने का अनुमान बताया गया है।

उपलब्ध जानकारी में कहा गया है कि यह उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में 12 फीसदी अधिक अनुमानित है। ऐसे में बाजार में एक तरफ उत्पादन का अनुमान ज्यादा बताया जा रहा है और दूसरी तरफ चीनी के दाम में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इसी वजह से बाजार में उपलब्धता, शुरुआती स्टॉक और मौजूदा कीमतों को लेकर चर्चा तेज हुई है।
ISMA ने कहा- चीनी की कमी नहीं
चीनी के दाम में तेजी के बीच इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन यानी ISMA की ओर से कहा गया है कि देश में चीनी की कमी नहीं है।

ISMA के महानिदेशक दीपक बलानी के अनुसार मौजूदा तेजी सट्टेबाजी और पैनिक बाइंग का नतीजा हो सकती है। उनके अनुसार सीजन खत्म होने तक क्लोजिंग स्टॉक करीब 35 से 40 लाख टन रहने की संभावना है। अगर यह अनुमान सही रहता है तो देश में चीनी की उपलब्धता पूरी तरह खत्म होने जैसी स्थिति नहीं होगी।
ISMA के आधिकारिक संसाधन और रिपोर्ट
ISMA Resources
ISMA के इस पक्ष के सामने चीनी के दाम में तेजी को लेकर बाजार में मौजूद दूसरी चिंताएं भी हैं। इनमें शुरुआती स्टॉक में कमी और एथेनॉल के लिए गन्ने तथा दूसरे कच्चे माल के इस्तेमाल की बात शामिल है। इसलिए फिलहाल इस मामले में अलग-अलग पक्षों के बयान सामने हैं।
कारोबारियों ने एथेनॉल नीति पर पहले से जताई थी चिंता
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स यानी CAIT के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठक्कर के अनुसार कारोबारियों की ओर से पिछले तीन वर्षों से गन्ने के एथेनॉल में इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई जा रही थी। उनका कहना है कि गन्ने का एथेनॉल में इस्तेमाल आगे चलकर मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
जानकारी के मुताबिक शंकर ठक्कर ने कहा है कि अब ऐसी स्थिति सामने आ रही है और सरकार को चीनी आयात करना पड़ रहा है। उनके अनुसार नवंबर से पहले दुनियाभर से पर्याप्त मात्रा में चीनी मिलने की संभावना कम है। उन्होंने यह भी कहा है कि सरकार रॉ शुगर के आयात की कोशिश कर रही है, लेकिन रॉ शुगर का निर्यात करने वाले देश बहुत कम हैं।इस बयान के बाद चीनी के दाम को लेकर एथेनॉल नीति और अंतरराष्ट्रीय उपलब्धता दोनों की चर्चा बढ़ गई है।
एथेनॉल में 67 फीसदी अनाज का इस्तेमाल
उपलब्ध जानकारी के अनुसार देश में एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल में करीब 67 फीसदी हिस्सा मक्का, चावल की टुकड़ी और खराब अनाज का है। बाकी करीब 33 फीसदी हिस्सा गन्ना और इसके उत्पादों से आता है। इस आंकड़े को पिछले साल के एथेनॉल उत्पादन के साथ जोड़कर देखा जाए तो देश में 720 करोड़ लीटर एथेनॉल उत्पादन की जानकारी दी गई है।
इसके लिए करीब 1.33 करोड़ टन अनाज और 25 लाख टन चीनी बनाने लायक गन्ना-शीरा इस्तेमाल हुआ। जानकारी के अनुसार इसमें 34 लाख टन गन्ना शामिल था। यानी एथेनॉल उत्पादन के लिए अनाज और गन्ने से जुड़े कच्चे माल की बड़ी मात्रा का इस्तेमाल होने की जानकारी सामने आई है। इसी कारण चीनी के दाम के साथ अनाज और पशु आहार के बाजार पर भी इसके संभावित असर की चर्चा हो रही है।
खराब अनाज की उपलब्धता घटने से पशु आहार महंगा
खराब अनाज का इस्तेमाल पशु आहार और पॉल्ट्री फीड बनाने में होने की जानकारी दी गई है। जानकारी के मुताबिक अब खराब अनाज की उपलब्धता घटने से पशु आहार की कीमत 8 से 10 फीसदी तक बढ़ी है। पशु आहार महंगा होने के साथ दूध और अंडे की कीमतों में भी 5 से 10 फीसदी तक बढ़ोतरी की बात कही गई है। यह पूरी स्थिति चीनी के दाम से जुड़े मौजूदा बाजार की एक बड़ी कड़ी के रूप में सामने रखी जा रही है।
मक्का और चावल जैसे अनाज के अलग-अलग इस्तेमाल हैं। खाद्य जरूरतों के अलावा इनका इस्तेमाल पशु आहार और एथेनॉल उत्पादन में भी किया जा रहा है। ऐसे में उपलब्धता और मांग के बीच संतुलन बाजार की कीमतों को प्रभावित कर सकता है।
रसोई पर असर का पूरा आंकड़ा
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन महीने में रसोई और उससे जुड़े बाजार में कई चीजों की कीमत बढ़ी है।
चीनी का भाव 48 रुपये से बढ़कर 67 रुपये किलो हुआ।
गुड़ 50 से बढ़कर 65 रुपये किलो पहुंचा।
चावल कनकी 25 से बढ़कर 29 रुपये किलो हुआ।
मक्के का आटा 36 से बढ़कर 40 रुपये किलो पहुंचा।
इडली रवा और राइस फ्लोर 38 से बढ़कर 42 रुपये किलो हुआ।
पशु आहार 29 से बढ़कर 32 रुपये किलो हुआ।
पॉल्ट्री फीड 23 से बढ़कर 25 रुपये किलो पहुंचा।
इन सभी आंकड़ों में चीनी के दाम की बढ़ोतरी सबसे ज्यादा है। चीनी की कीमत में 19 रुपये प्रति किलो यानी करीब 39.58 फीसदी की बढ़ोतरी बताई गई है।
इसके बाद गुड़ में 15 रुपये यानी 24 फीसदी, चावल कनकी में 4 रुपये यानी 16 फीसदी और मक्के के आटे में 4 रुपये यानी 11.11 फीसदी की बढ़ोतरी बताई गई है।
पिछले साल 47 लाख टन था ओपनिंग स्टॉक
मिलों के ओपनिंग स्टॉक के आंकड़े भी चीनी के दाम की मौजूदा स्थिति को समझने में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। 2025-26 में पेराई से पहले मिलों के पास करीब 47 लाख टन चीनी का ओपनिंग स्टॉक था। 2026-27 पेराई सीजन से पहले यह स्टॉक करीब 32 लाख टन बताया गया है।
यानी इस बार शुरुआती स्टॉक पिछले साल के मुकाबले करीब 15 लाख टन कम है। जानकारी के मुताबिक 2025-26 में 25 लाख टन चीनी बनाने लायक गन्ना-शीरा एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल हुआ। इसी इस्तेमाल को शुरुआती स्टॉक में कमी की बड़ी वजहों में से एक बताया जा रहा है।
उत्पादन बढ़ने का अनुमान फिर भी कीमतों में तेजी
ISMA के अनुमान के अनुसार 2026-27 में गन्ने का उत्पादन करीब 46.3 करोड़ टन और चीनी उत्पादन करीब 3.36 करोड़ टन रह सकता है।चीनी उत्पादन पिछले साल से 12 फीसदी अधिक रहने का अनुमान बताया गया है। ऐसे में चीनी के दाम में मौजूदा तेजी के बीच उत्पादन के आंकड़े एक अलग तस्वीर पेश करते हैं।
एक तरफ उत्पादन अधिक रहने का अनुमान है। दूसरी तरफ शुरुआती स्टॉक कम है। तीसरी तरफ एथेनॉल उत्पादन में गन्ने और अनाज के इस्तेमाल की जानकारी है। इसके अलावा बाजार में पैनिक बाइंग और सट्टेबाजी की बात भी ISMA की ओर से कही गई है।
इन सभी बातों के आधार पर बाजार की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए उत्पादन के साथ-साथ स्टॉक और मांग की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है।
निर्यात का आंकड़ा भी बदला
चीनी के दाम में मौजूदा तेजी की चर्चा के बीच चीनी और इससे जुड़े उत्पादों के निर्यात के आंकड़ों में भी बड़ा बदलाव सामने आया है। वाणिज्यिक मामलों के मंत्रालय के अनुसार 2022-23 में करीब 1.33 करोड़ टन चीनी-शीरा और इससे बने उत्पादों का निर्यात हुआ था। 2023-24 में यह निर्यात घटकर 51.35 लाख टन रह गया। 2024-25 में निर्यात 38.43 लाख टन तक सीमित हो गया।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार 2026-27 में चीनी का निर्यात शून्य रहने की बात कही गई है, क्योंकि इस बार देश को चीनी आयात करने की नौबत आई है। यानी चार साल पहले जिस क्षेत्र से 1.33 करोड़ टन तक निर्यात की जानकारी सामने आई थी, उसी क्षेत्र में अब आयात की जरूरत की बात कही जा रही है।
निर्यात से आयात तक पहुंची स्थिति
चीनी कारोबार में यह बदलाव चीनी के दाम की मौजूदा तस्वीर का एक अहम हिस्सा है। 2022-23 में 1.33 करोड़ टन का निर्यात बताया गया। इसके बाद 2023-24 में निर्यात 51.35 लाख टन हुआ। 2024-25 में यह 38.43 लाख टन रह गया। अब 2026-27 में निर्यात शून्य रहने की जानकारी दी गई है।
इसका कारण यह बताया गया है कि घरेलू जरूरत को पूरा करने के लिए आयात की आवश्यकता पड़ रही है। सरकार ने इसी क्रम में रॉ शुगर के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है।
नवंबर से पहले चीनी मिलने की चुनौती
CAIT के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठक्कर के अनुसार नवंबर से पहले दुनियाभर से पर्याप्त चीनी मिलने की संभावना कम है। उनके अनुसार सरकार रॉ शुगर के आयात के प्रयास में है, लेकिन ऐसी चीनी का निर्यात करने वाले देश बहुत कम हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब चीनी के दाम घरेलू बाजार में तेजी से बढ़े हैं और सरकार ने 10 लाख टन रॉ शुगर के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। आयात की अनुमति के बाद अब बाजार में इसकी उपलब्धता और समय पर आपूर्ति पर नजर रहेगी।
पैनिक बाइंग का भी जिक्र
ISMA के महानिदेशक दीपक बलानी के अनुसार चीनी के दाम में मौजूदा तेजी का एक कारण पैनिक बाइंग हो सकता है।
पैनिक बाइंग का मतलब ऐसी स्थिति से है, जब बाजार में भविष्य में कमी की आशंका के कारण खरीदार सामान्य जरूरत से अधिक मात्रा में खरीदारी करने लगते हैं। ISMA की ओर से कहा गया है कि चीनी की वास्तविक कमी नहीं है। साथ ही सीजन खत्म होने तक 35 से 40 लाख टन क्लोजिंग स्टॉक रहने की बात कही गई है। इस बयान के आधार पर मौजूदा चीनी दाम में तेजी को लेकर उद्योग संगठन ने उपलब्धता की स्थिति पर अलग आकलन दिया है।
कारोबारियों का दूसरा पक्ष
दूसरी तरफ CAIT के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठक्कर ने एथेनॉल के लिए गन्ने के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई है। उनके अनुसार कारोबारी संगठन पिछले तीन वर्षों से इस मुद्दे पर बात कर रहा है।
उनका कहना है कि एथेनॉल में गन्ने के इस्तेमाल से आने वाले समय में चीनी के बाजार में दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। उनके अनुसार अब सरकार को चीनी आयात करना पड़ रहा है। इस तरह चीनी के दाम को लेकर उद्योग संगठन और कारोबारी संगठन की ओर से अलग-अलग बातें सामने आई हैं।
सरकार के फैसले से क्या बदलेगा?
सरकार ने चीनी के दाम पर नियंत्रण के लिए दो महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
पहला कदम है 10 लाख टन रॉ शुगर का शुल्क-मुक्त आयात।
दूसरा कदम है बड़े थोक उपभोक्ताओं पर स्टॉक लिमिट।
टैरिफ रेट कोटा के तहत आयात की अनुमति 31 अक्टूबर तक दी गई है। स्टॉक लिमिट उन थोक उपभोक्ताओं पर लागू की गई है जिनकी मासिक खपत 10 टन से अधिक है। इन कदमों के जरिए बाजार में उपलब्धता बनाए रखने और बड़े स्तर पर स्टॉक रखने की स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया है।
50 लाख टन घरेलू जरूरत का आंकड़ा
मौजूदा चीनी के दाम की चर्चा में घरेलू खपत के लिए जरूरी स्टॉक का आंकड़ा भी सामने आया है।
जानकारी के अनुसार 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले 2026-27 सीजन में ओपनिंग स्टॉक घरेलू खपत के लिए जरूरी 50 लाख टन से कम रहने का अनुमान है। पिछले साल मिलों का ओपनिंग स्टॉक 47 लाख टन था, जबकि इस बार यह 32 लाख टन बताया गया है।
इस अंतर के कारण बाजार में शुरुआती उपलब्धता को लेकर चिंता की स्थिति बनी है। हालांकि ISMA के अनुसार सीजन खत्म होने तक क्लोजिंग स्टॉक 35 से 40 लाख टन रह सकता है और चीनी की वास्तविक कमी नहीं है।
एथेनॉल के लिए इस्तेमाल हुआ गन्ना-शीरा
जानकारी के मुताबिक 2025-26 में 25 लाख टन चीनी बनाने लायक गन्ना-शीरा एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल हुआ। इसके साथ पिछले साल 720 करोड़ लीटर एथेनॉल उत्पादन की जानकारी भी दी गई है। एथेनॉल के लिए 1.33 करोड़ टन अनाज और 25 लाख टन चीनी बनाने लायक गन्ना-शीरा इस्तेमाल होने की बात कही गई है।
इसमें 34 लाख टन गन्ने का आंकड़ा भी दिया गया है। यही वजह है कि चीनी दाम की मौजूदा स्थिति में एथेनॉल उत्पादन को लेकर भी चर्चा हो रही है।
अनाज के इस्तेमाल का असर
एथेनॉल उत्पादन में 67 फीसदी मक्का, चावल की टुकड़ी और खराब अनाज के इस्तेमाल की जानकारी दी गई है।
इनमें से खराब अनाज का इस्तेमाल पशु आहार और पॉल्ट्री फीड में होने की बात कही गई है।
उपलब्धता घटने से पशु आहार 8 से 10 फीसदी तक महंगा होने की जानकारी है।
इसके बाद दूध और अंडे की कीमत में 5 से 10 फीसदी तक बढ़ोतरी की बात सामने आई है।
इस तरह चीनी के दाम की बढ़ोतरी के साथ-साथ खाद्य अनाज, पशु आहार और डेयरी-पोल्ट्री बाजार की कीमतों का मुद्दा भी सामने आया है।
बाजार में बढ़ी कीमतों की पूरी तस्वीर
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक तीन महीने में:
- चीनी 48 से बढ़कर 67 रुपये किलो हुई।
- गुड़ 50 से बढ़कर 65 रुपये किलो हुआ।
- चावल कनकी 25 से बढ़कर 29 रुपये किलो हुआ।
- मक्के का आटा 36 से बढ़कर 40 रुपये किलो हुआ।
- इडली रवा/राइस फ्लोर 38 से बढ़कर 42 रुपये किलो हुआ।
- पशु आहार 29 से बढ़कर 32 रुपये किलो हुआ।
- पॉल्ट्री फीड 23 से बढ़कर 25 रुपये किलो हुआ।
इन आंकड़ों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी चीनी के दाम में बताई गई है।
चीनी की कीमत में 39.58 फीसदी, गुड़ में 24 फीसदी, चावल कनकी में 16 फीसदी, मक्के के आटे में 11.11 फीसदी, इडली रवा/राइस फ्लोर में 10.53 फीसदी, पशु आहार में 10.34 फीसदी और पॉल्ट्री फीड में 8.70 फीसदी की बढ़ोतरी बताई गई है।
चीनी उत्पादन और उद्योग से जुड़े आंकड़े — Indian Sugar & Bio-energy Manufacturers Association (ISMA)
ISMA – Indian Sugar & Bio-energy Manufacturers Association
चार साल के निर्यात आंकड़े क्या कहते हैं?
2022-23 में चीनी-शीरा और इससे बने उत्पादों का निर्यात 1.33 करोड़ टन बताया गया।
2023-24 में यह आंकड़ा 51.35 लाख टन रहा।
2024-25 में निर्यात 38.43 लाख टन रह गया।
2026-27 के लिए चीनी निर्यात का आंकड़ा शून्य रहने की जानकारी दी गई है।
इस बदलाव के बीच चीनी के दाम घरेलू बाजार में तेजी से बढ़े हैं और सरकार को आयात की अनुमति देनी पड़ी है।

क्या घरेलू उत्पादन पर्याप्त रहेगा?
ISMA के अनुसार 2026-27 में गन्ने का उत्पादन 46.3 करोड़ टन और चीनी उत्पादन 3.36 करोड़ टन रहने का अनुमान है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह चीनी उत्पादन पिछले साल से 12 फीसदी ज्यादा रहने का अनुमान है।
वहीं ओपनिंग स्टॉक पिछले साल के 47 लाख टन के मुकाबले इस बार 32 लाख टन बताया गया है।
यानी उत्पादन का अनुमान और शुरुआती स्टॉक के आंकड़े अलग-अलग स्थिति दिखा रहे हैं।
इसी बीच चीनी के दाम में करीब 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
बाजार की नजर अब आगे की आपूर्ति पर
सरकार के 10 लाख टन रॉ शुगर के शुल्क-मुक्त आयात के फैसले के बाद अब बाजार में इसकी आपूर्ति पर नजर रहेगी।
31 अक्टूबर तक आयात की अनुमति दी गई है।
इसके साथ ही बड़े थोक उपभोक्ताओं पर स्टॉक लिमिट लागू की गई है।
चीनी के दाम में बढ़ोतरी के बीच सरकार के ये कदम बाजार में उपलब्धता और स्टॉक की स्थिति से जुड़े हैं।
वहीं, ISMA की ओर से चीनी की कमी नहीं होने की बात कही गई है और पैनिक बाइंग तथा सट्टेबाजी को तेजी की वजह बताया गया है।
दूसरी तरफ CAIT की ओर से एथेनॉल में गन्ने के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई गई है।
एक तरफ एथेनॉल, दूसरी तरफ चीनी बाजार
देश में एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए मक्का, चावल की टुकड़ी, खराब अनाज और गन्ने से जुड़े उत्पादों के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई है।
पिछले साल 720 करोड़ लीटर एथेनॉल उत्पादन हुआ।
इसके लिए 1.33 करोड़ टन अनाज और 25 लाख टन चीनी बनाने लायक गन्ना-शीरा इस्तेमाल हुआ।
इसी अवधि में चीनी के दाम में भी तेजी देखने को मिली।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह भी कहा गया है कि चीनी की वास्तविक कमी नहीं है।
इसलिए इस पूरे मामले में अलग-अलग पक्षों की ओर से अलग-अलग कारण बताए जा रहे हैं।
अब सरकार की नजर स्टॉक और आयात पर
बढ़ते चीनी के दाम के बीच सरकार ने स्टॉक लिमिट लगाने और रॉ शुगर आयात करने का फैसला किया है।
10 लाख टन रॉ शुगर के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति 31 अक्टूबर तक है।
हर माह 10 टन से ज्यादा खपत करने वाले थोक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक लिमिट का प्रावधान किया गया है।
इन फैसलों के बाद बाजार में चीनी की उपलब्धता और कीमत पर नजर रहेगी।
वहीं 2026-27 सीजन में गन्ने और चीनी उत्पादन का अनुमान भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
रसोई के बजट पर बढ़ता दबाव
चीनी के दाम बढ़ने के साथ गुड़, चावल, मक्के का आटा और राइस फ्लोर की कीमतें भी बढ़ी हैं।
पशु आहार और पॉल्ट्री फीड की कीमतों में भी बढ़ोतरी की जानकारी सामने आई है।
दूध और अंडे की कीमतों में 5 से 10 फीसदी तक वृद्धि होने की बात कही गई है।
इस तरह उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार महंगे होते खाद्य और पशु आहार बाजार की तस्वीर सामने आ रही है।
चीनी की कीमत तीन महीने में 19 रुपये किलो बढ़ी है। गुड़ 15 रुपये किलो महंगा हुआ है। चावल कनकी और मक्के के आटे की कीमत 4-4 रुपये किलो बढ़ी है।
आगे की तस्वीर क्या होगी?
आने वाले समय में चीनी के दाम की स्थिति कई आंकड़ों पर निर्भर करेगी।
2026-27 सीजन में गन्ने का वास्तविक उत्पादन कितना रहता है, चीनी उत्पादन कितना होता है, शुरुआती स्टॉक कितना रहता है, एथेनॉल के लिए कितना गन्ना और अनाज इस्तेमाल होता है, रॉ शुगर का आयात कितनी मात्रा में और कितनी जल्दी पहुंचता है तथा थोक उपभोक्ताओं की स्टॉक लिमिट का बाजार पर क्या असर पड़ता है—इन सभी चीजों पर बाजार की नजर रहेगी।
ISMA के अनुसार चीनी की कमी नहीं है और सीजन के अंत में 35 से 40 लाख टन क्लोजिंग स्टॉक रहने की संभावना है।
वहीं CAIT के अनुसार एथेनॉल में गन्ने के इस्तेमाल से चीनी बाजार में परेशानी की स्थिति पैदा हो रही है।
इन दोनों पक्षों के बयानों के बीच सरकार ने आयात और स्टॉक लिमिट के जरिए बाजार में हस्तक्षेप किया है।
मीठी चीनी ने खड़े किए कई सवाल
मौजूदा चीनी के दाम की स्थिति में एक साथ कई आंकड़े सामने हैं।
तीन महीने में चीनी 48 से 67 रुपये किलो हो गई।
गुड़ 50 से 65 रुपये किलो पहुंच गया।
चावल कनकी 25 से 29 रुपये किलो हो गया।
मक्के का आटा 36 से 40 रुपये किलो हो गया।
इडली रवा और राइस फ्लोर 38 से 42 रुपये किलो हो गया।
पशु आहार 29 से 32 रुपये और पॉल्ट्री फीड 23 से 25 रुपये किलो हो गया।
उधर, पिछले साल 47 लाख टन के मुकाबले इस बार मिलों का ओपनिंग स्टॉक 32 लाख टन बताया गया है।
दूसरी तरफ 2026-27 में गन्ने का उत्पादन 46.3 करोड़ टन और चीनी उत्पादन 3.36 करोड़ टन रहने का अनुमान है।
ISMA चीनी की कमी से इनकार कर रहा है और तेजी को सट्टेबाजी तथा पैनिक बाइंग से जोड़ रहा है।
CAIT एथेनॉल में गन्ने के इस्तेमाल को लेकर चिंता जता रहा है।
सरकार ने 10 लाख टन रॉ शुगर के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है और बड़े थोक उपभोक्ताओं पर स्टॉक लिमिट लगाई है।
निर्यात के आंकड़ों में भी बड़ा बदलाव आया है। 2022-23 में 1.33 करोड़ टन चीनी-शीरा और इससे बने उत्पादों के निर्यात की जानकारी है। 2023-24 में यह 51.35 लाख टन और 2024-25 में 38.43 लाख टन रह गया। 2026-27 में निर्यात शून्य रहने की जानकारी दी गई है, क्योंकि घरेलू जरूरत के लिए आयात की स्थिति बनी है।
यानी चीनी के दाम की मौजूदा कहानी सिर्फ बाजार भाव की कहानी नहीं है। इसमें ओपनिंग स्टॉक, गन्ना उत्पादन, चीनी उत्पादन, एथेनॉल, अनाज, पशु आहार, निर्यात और आयात से जुड़े कई आंकड़े शामिल हैं।
फिलहाल सरकार की ओर से रॉ शुगर आयात और स्टॉक लिमिट के कदम उठाए गए हैं। उद्योग संगठन की ओर से चीनी की कमी नहीं होने की बात कही गई है। व्यापार संगठन ने एथेनॉल नीति को लेकर अपनी चिंता सामने रखी है।
अब बाजार में नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले समय में चीनी के दाम किस दिशा में जाते हैं और सरकार के उठाए गए कदमों का घरेलू बाजार पर कितना असर दिखाई देता है।
तीन महीने में कीमतों का पूरा हिसाब
| उत्पाद | अभी दाम | 3 माह पहले | बढ़ोतरी | प्रतिशत बढ़ोतरी |
|---|---|---|---|---|
| चीनी | ₹67 | ₹48 | ₹19 | 39.58% |
| गुड़ | ₹65 | ₹50 | ₹15 | 24% |
| चावल कनकी | ₹29 | ₹25 | ₹4 | 16% |
| मक्के का आटा | ₹40 | ₹36 | ₹4 | 11.11% |
| इडली रवा/राइस फ्लोर | ₹42 | ₹38 | ₹4 | 10.53% |
| पशु आहार | ₹32 | ₹29 | ₹3 | 10.34% |
| पॉल्ट्री फीड | ₹25 | ₹23 | ₹2 | 8.70% |
दाम रुपये प्रति किलो में हैं। आंकड़े उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार हैं।
