आठ जिलों में बदली शिक्षा प्रशासन की कमान, प्रभार के सहारे चल रहा पूरा महकमा, जानें किसे मिली कहां जिम्मेदारी ?

रायपुर. छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में हाल ही में जारी तबादला और पदस्थापना आदेश ने राज्य के शिक्षा प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ी हलचल मचा दी है। दुर्ग, मुंगेली, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, बलौदाबाजार-भाटापारा, मोहला-मानपुर और सूरजपुर — इन आठ जिलों में जिला शिक्षा अधिकारी बदल दिए गए हैं, जिससे स्कूली शिक्षा से जुड़े प्रशासनिक कामकाज पर सीधा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही संभागीय स्तर पर भी बड़ा उलटफेर हुआ है, जिसने इस पूरे फेरबदल को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।

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संभागीय स्तर पर अदला-बदली, एक अनोखा प्रशासनिक निर्णय

इस फेरबदल की सबसे खास बात यह है कि बिलासपुर और सरगुजा, दोनों संभागों के संयुक्त संचालक आपस में अपने-अपने पदों पर अदला-बदली कर दिए गए हैं। राजेश सिंह, जो अब तक बिलासपुर संभाग में प्राचार्य एवं प्रभारी उप संचालक थे, अब सरगुजा संभाग की कमान संभाल रहे हैं, जबकि अश्वनी भारद्वाज, जो सरगुजा में इसी पद पर कार्यरत थे, उन्हें बिलासपुर संभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

प्रशासनिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की सीधी अदला-बदली आमतौर पर तब की जाती है जब विभाग चाहता है कि दोनों अधिकारी नई जगह जाकर नए सिरे से काम शुरू करें और स्थानीय स्तर पर बने किसी भी संभावित ठहराव को तोड़ा जा सके। राजेश सिंह को संयुक्त संचालक सरगुजा का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है, जो यह दर्शाता है कि विभाग उन्हें सरगुजा संभाग में एक मजबूत भूमिका देना चाहता है।

जिलों में ज्यादातर नियुक्तियां “प्रभार” के आधार पर

जिलों की स्थिति पर गौर करें तो एक स्पष्ट पैटर्न सामने आता है, ज्यादातर नई नियुक्तियां मौजूदा प्राचार्यों को अतिरिक्त प्रभार देकर की गई हैं, न कि स्थायी जिला शिक्षा अधिकारी नियुक्त करके। यह दर्शाता है कि विभाग फिलहाल स्थायी DEO नियुक्ति व्यवस्था के बजाय प्रभार व्यवस्था के सहारे प्रशासनिक कामकाज चला रहा है। उदाहरण के तौर पर मुंगेली, बिलासपुर, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, बलौदाबाजार-भाटापारा, मोहला-मानपुर और जांजगीर-चांपा, इन सभी जिलों में “प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी” के तौर पर नई नियुक्तियां हुई हैं।

मुंगेली जिले में डॉ. मोहन लाल पटेल, जो बिलासपुर के राजेंद्र नगर स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में प्राचार्य थे, को अब प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी तरह बिलासपुर जिले में करतला, कोरबा से आए संदीप कुमार पांडे को नई जिम्मेदारी मिली है। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में उपेंद्र कुमार देवांगन और बलौदाबाजार-भाटापारा में शिव कुमार गेंदले को भी इसी तरह प्राचार्य पद से सीधे जिला शिक्षा अधिकारी के प्रभार पर लाया गया है।

दुर्ग जिला अपवाद, यहां सीधी नियुक्ति

हालांकि दुर्ग जिले में स्थिति थोड़ी अलग है। यहां जगजीत धीर को सीधे जिला शिक्षा अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो इससे पहले लोक शिक्षण संचालनालय, रायपुर में प्राचार्य एवं सहायक संचालक के पद पर कार्यरत थे। संचालनालय स्तर से जिला स्तर पर नियुक्ति यह संकेत देती है कि दुर्ग जैसे बड़े और महत्वपूर्ण जिले के लिए विभाग ने विशेष रूप से अनुभवी अधिकारी को चुना है।

समग्र शिक्षा और DIET जैसे विशेष प्रकल्पों में भी नियुक्तियां

इस फेरबदल का एक और दिलचस्प पहलू यह है कि कुछ अधिकारियों को जिला शिक्षा अधिकारी के पद से हटाकर समग्र शिक्षा और DIET जैसे विशेष शैक्षणिक प्रकल्पों में भेजा गया है। रामेश्वर जायसवाल, जो बिलासपुर के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी थे, उन्हें अब प्रतिनियुक्ति पर जांजगीर-चांपा जिले में समग्र शिक्षा के जिला समन्वयक के पद पर भेजा गया है। समग्र शिक्षा अभियान के तहत स्कूली शिक्षा से जुड़ी कई केंद्र और राज्य प्रायोजित योजनाएं संचालित होती हैं, इसलिए इस पद पर नियुक्ति को भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इसी तरह मोहला-मानपुर के मौजूदा प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी योगदास साहू को प्रतिनियुक्ति पर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET), खैरागढ़-छुईखदान-गंडई का प्राचार्य नियुक्त किया गया है। DIET संस्थान शिक्षकों के प्रशिक्षण और शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए इस नियुक्ति को भी विभाग की प्राथमिकताओं से जोड़कर देखा जा रहा है।

जांजगीर-चांपा और सूरजपुर में भी बदलाव की कड़ी

जांजगीर-चांपा जिले में एके सिन्हा को हटाकर सूरजपुर भेजा गया है, जबकि उनकी जगह जांजगीर-चांपा में मनोहर प्रताप सिंह को प्रभार दिया गया है, जो पहले खिसोरा स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में प्राचार्य थे। यह बदलाव भी उसी पैटर्न का हिस्सा है जिसमें स्थानीय प्राचार्यों को पदोन्नति के बजाय अतिरिक्त प्रभार देकर प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।

आगे की राह और संभावित असर

शिक्षा विभाग के इस बड़े प्रशासनिक बदलाव के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई पदस्थापना से जिलों में स्कूली शिक्षा से जुड़े कामकाज में कितनी तेजी और सुधार आता है। चूंकि ज्यादातर नियुक्तियां प्रभार के आधार पर की गई हैं, इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि विभाग को जल्द ही स्थायी जिला शिक्षा अधिकारियों की नियुक्ति की दिशा में भी कदम उठाने होंगे, ताकि दीर्घकालिक प्रशासनिक स्थिरता बनी रहे।

फिलहाल, नए अधिकारियों के सामने अपने-अपने जिलों में स्कूल निरीक्षण, शिक्षक भर्ती, अधोसंरचना और शैक्षणिक गुणवत्ता से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाने की चुनौती होगी। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस व्यापक फेरबदल का जमीनी स्तर पर स्कूली शिक्षा व्यवस्था पर क्या असर पड़ता है।

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