बालाकोट स्ट्राइक के बाद पाकिस्तानी F-16 मार गिराने वाले वीर चक्र विजेता अब कमर्शियल पायलट बने
नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के पूर्व ग्रुप कैप्टन और वीर चक्र विजेता अभिनंदन वर्धमान ने करीब दो दशक की सेवा के बाद वर्दी उतार दी है। अधिकारियों के मुताबिक उन्होंने 31 मार्च 2026 को वायुसेना से रिटायरमेंट लिया। इसके कुछ महीने बाद, अगस्त में, वे क्षेत्रीय एयरलाइन FLY91 से जुड़ गए। अब वे कमर्शियल यात्री विमान के पायलट के तौर पर नई ज़िम्मेदारी संभालेंगे। भारतीय वायुसेना: Indian Air Force
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यह खबर उस शख्स से जुड़ी है, जिसका नाम 2019 में हर घर तक पहुंच गया था — जब उन्होंने पाकिस्तान के फाइटर जेट F-16 को मार गिराया और खुद दुश्मन के इलाके में उतरने के बावजूद पूरे देश के लिए हिम्मत की मिसाल बन गए।
अभिनंदन वर्धमान की दो दशक की सेवा के बाद नई पारी
अभिनंदन वर्धमान ने भारतीय वायुसेना में करीब बीस साल सेवा दी। इस दौरान उन्होंने कई लड़ाकू विमानों की स्क्वाड्रन में काम किया और आखिरकार ग्रुप कैप्टन के पद तक पहुंचे। 31 मार्च 2026 को उन्होंने औपचारिक रूप से वायुसेना छोड़ दी। रिटायरमेंट के बाद कुछ महीने का अंतराल रहा, और फिर अगस्त 2026 में उन्होंने क्षेत्रीय एयरलाइन FLY91 जॉइन कर ली।

FLY91 में उनकी भूमिका कमर्शियल यात्री विमान उड़ाने की होगी। यानी जिस कॉकपिट में कभी लड़ाकू विमान की स्पीड और मिसाइलों का सामना करने की तैयारी होती थी, अब वहां आम यात्रियों को एक शहर से दूसरे शहर सुरक्षित पहुंचाने की ज़िम्मेदारी होगी। सैन्य विमानन से नागरिक विमानन में यह बदलाव भारत में असामान्य नहीं है — कई पूर्व वायुसेना पायलट रिटायरमेंट के बाद कमर्शियल एयरलाइनों से जुड़ते रहे हैं, क्योंकि उनके पास उड़ान का गहरा अनुभव और तकनीकी दक्षता पहले से मौजूद होती है।
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वह शख्स, जिसे पूरा देश जानता है
अभिनंदन वर्धमान 27 फरवरी 2019 को अचानक राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गए थे। उस दिन उन्होंने एक हवाई मुठभेड़ में पाकिस्तानी वायुसेना के F-16 लड़ाकू विमान को मार गिराया था। इस कार्रवाई के दौरान उनका अपना विमान, मिग-21, दुश्मन की मिसाइल की चपेट में आ गया। विमान को नुकसान पहुंचने के बाद उन्होंने इजेक्ट किया और पैराशूट के सहारे पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके में जा उतरे।
वहां पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने उन्हें हिरासत में ले लिया। करीब 60 घंटे बंदी बनाए रखने के बाद, 1 मार्च 2019 को पाकिस्तान ने उन्हें भारत को सौंप दिया। उनकी वापसी उस समय पूरे देश के लिए राहत और गर्व का पल बन गई थी।
जिस हमले से शुरू हुई पूरी घटना
यह पूरा घटनाक्रम 14 फरवरी 2019 को हुए पुलवामा आतंकी हमले से शुरू हुआ था। उस दिन जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में CRPF के एक काफिले को निशाना बनाया गया, जिसमें 40 जवान शहीद हो गए थे। यह हमला हाल के वर्षों में सुरक्षाबलों पर हुए सबसे बड़े हमलों में गिना जाता है और इसने पूरे देश को झकझोर दिया था।
इस हमले के जवाब में भारत ने 26 फरवरी 2019 को पाकिस्तान के बालाकोट में हवाई हमला किया। यह कार्रवाई सीमा पार जाकर आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए की गई थी, और इसने दोनों देशों के बीच तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया।
अगले दिन आसमान में हुआ अभिनंदन वर्धमान का मुकाबला
बालाकोट हमले के अगले ही दिन, 27 फरवरी को, पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमानों का एक बड़ा समूह नियंत्रण रेखा (LoC) की ओर बढ़ा। उस वक्त अभिनंदन वर्धमान श्रीनगर एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात थे और मिग-21 बाइसन स्क्वाड्रन का हिस्सा थे। वे उस समय ऑपरेशनल रेडीनेस ड्यूटी पर मौजूद थे, यानी किसी भी आपात स्थिति के लिए तुरंत उड़ान भरने को तैयार।
जैसे ही पाकिस्तानी विमानों की मौजूदगी का पता चला, करीब पांच मिनट के भीतर अभिनंदन को उन्हें रोकने के लिए भेज दिया गया। आधिकारिक प्रशस्ति-पत्र के अनुसार, उन्होंने पीछे हटते हुए एक दुश्मन विमान का पीछा किया और हवाई लड़ाई में उसे मार गिराया। यह पूरा घटनाक्रम कुछ ही मिनटों में घटित हुआ, पर इसका असर लंबे समय तक महसूस किया गया।
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मिसाइल की चपेट में आया अभिनंदन वर्धमान का विमान, पैराशूट से पाकिस्तान में उतरना पड़ा
इस हवाई मुठभेड़ के दौरान पाकिस्तानी विमानों ने कई बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइलें दागीं — यानी ऐसी मिसाइलें जो पायलट की सीधी नज़र की सीमा से बाहर से भी दुश्मन विमान को निशाना बना सकती हैं। इनमें से एक मिसाइल अभिनंदन वर्धमान के मिग-21 विमान से टकरा गई।
विमान को गंभीर नुकसान पहुंचने के बाद उनके पास इजेक्ट करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। वे पैराशूट के सहारे नीचे उतरे, पर हवा का रुख ऐसा रहा कि वे नियंत्रण रेखा पार कर पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके में जा गिरे। वहीं पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने उन्हें पकड़ लिया।
इसके बाद के 60 घंटे भारत के लिए बेहद तनावपूर्ण रहे। कूटनीतिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनी स्थिति के बीच आखिरकार 1 मार्च 2019 को पाकिस्तान ने अभिनंदन को भारत को सुरक्षित सौंप दिया। वाघा बॉर्डर से उनकी वापसी का पल देशभर में टीवी स्क्रीनों पर सीधा प्रसारित हुआ था और लाखों लोगों ने उसे देखा।
वीर चक्र से सम्मान — देश का तीसरा सबसे बड़ा वीरता पुरस्कार
इस साहसिक कार्रवाई के लिए अभिनंदन वर्धमान को वीर चक्र से सम्मानित किया गया। वीर चक्र भारत का तीसरा सबसे बड़ा युद्धकालीन वीरता पुरस्कार है, जो परमवीर चक्र और महावीर चक्र के बाद आता है। यह सम्मान युद्ध या दुश्मन के सामने असाधारण बहादुरी दिखाने वाले सैन्यकर्मियों को दिया जाता है।

भारत सरकार के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक प्रशस्ति-पत्र में साफ लिखा गया है कि अभिनंदन वर्धमान ने पाकिस्तानी विमानों की संख्या और तकनीकी बढ़त के बावजूद पूरे साहस के साथ उनका मुकाबला किया। प्रशस्ति-पत्र के अनुसार उनके आक्रामक युद्धाभ्यास ने दुश्मन के विमानों की रणनीति में अव्यवस्था पैदा कर दी थी, जिससे भारतीय क्षेत्र में उनकी योजना असफल हो गई।
यह सम्मान सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उस पूरी घटना का प्रतीक बन गया, जिसने 2019 में भारत-पाकिस्तान संबंधों को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया था।
अभिनंदन वर्धमान अब FLY91 के कॉकपिट में
अभिनंदन वर्धमान अब जिस एयरलाइन से जुड़े हैं, वह FLY91 एक अपेक्षाकृत नई क्षेत्रीय एयरलाइन है। इसने मार्च 2024 में अपनी कमर्शियल उड़ानें शुरू की थीं। इसका मुख्य फोकस देश के छोटे शहरों को हवाई सेवा से जोड़ना और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना है — यानी उन रास्तों पर उड़ानें चलाना, जहां बड़ी एयरलाइनें अक्सर नहीं पहुंचतीं।
फिलहाल एयरलाइन के बेड़े में 6 ATR 72-600 विमान शामिल हैं। ये टर्बोप्रॉप विमान होते हैं, जो खासतौर पर कम दूरी की उड़ानों के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं। हर विमान में करीब 70 यात्रियों के बैठने की क्षमता होती है। ऐसे विमान छोटे रनवे वाले हवाई अड्डों पर भी आसानी से उतर सकते हैं, इसलिए क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए इन्हें प्राथमिकता दी जाती है।
FLY91 के दो प्रमुख परिचालन केंद्र गोवा और हैदराबाद में स्थित हैं। एयरलाइन इन्हीं दोनों केंद्रों से अलग-अलग क्षेत्रीय शहरों के बीच अपनी उड़ानों का संचालन करती है, और इस तरह उन इलाकों को हवाई मानचित्र पर लाने की कोशिश करती है, जो अब तक बड़ी उड़ानों की पहुंच से बाहर रहे हैं।
अभिनंदन वर्धमान का लड़ाकू कॉकपिट से यात्री कॉकपिट तक का सफर
अभिनंदन वर्धमान का यह करियर बदलाव भारतीय वायुसेना के कई पूर्व पायलटों की तरह ही है, जो रिटायरमेंट के बाद नागरिक विमानन क्षेत्र का रुख करते हैं। लड़ाकू विमान उड़ाने का अनुभव, तेज़ फैसले लेने की क्षमता और गहन तकनीकी प्रशिक्षण — ये सभी गुण कमर्शियल एविएशन में भी बेहद काम आते हैं, यही वजह है कि एयरलाइनें अक्सर पूर्व वायुसेना पायलटों को प्राथमिकता देती हैं।
अभिनंदन के लिए यह बदलाव खास इसलिए भी मायने रखता है, क्योंकि उनका नाम अब सिर्फ 2019 की उस बहादुरी भरी घटना से नहीं, बल्कि आम नागरिकों को हर दिन सुरक्षित उड़ान पहुंचाने की नई ज़िम्मेदारी से भी जुड़ेगा। जिस शख्स ने कभी दुश्मन के आसमान में विमान उड़ाया था, अब वही शख्स आम भारतीय यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने का काम करेगा।
एक नज़र में — पूरा घटनाक्रम
- 14 फरवरी 2019: पुलवामा में CRPF काफिले पर आतंकी हमला, 40 जवान शहीद
- 26 फरवरी 2019: भारत की बालाकोट में एयरस्ट्राइक
- 27 फरवरी 2019: पाकिस्तानी विमानों की LoC की ओर बढ़त, अभिनंदन की तैनाती और F-16 को मार गिराना
- 27 फरवरी 2019: मिसाइल की चपेट में आकर मिग-21 क्षतिग्रस्त, पैराशूट से पाकिस्तान के इलाके में उतरना, हिरासत में लिया जाना
- 1 मार्च 2019: करीब 60 घंटे बाद भारत को सुरक्षित सौंपा जाना
- बाद में: वीर चक्र से सम्मान
- 31 मार्च 2026: वायुसेना से रिटायरमेंट
- अगस्त 2026: FLY91 एयरलाइन जॉइन करना, कमर्शियल पायलट के तौर पर नई पारी
करीब दो दशक तक देश की सीमाओं की रक्षा करने के बाद, अभिनंदन वर्धमान अब आसमान में एक नई भूमिका में नज़र आएंगे — इस बार लड़ाई के मैदान में नहीं, बल्कि आम यात्रियों के भरोसे के साथ।
