सीतापुर में NH-43 की 3 किमी सड़क गड्ढों और कीचड़ में बदहाल है। बारिश में जलभराव से हादसे का खतरा बढ़ा, लोगों ने तत्काल मरम्मत की मांग की।
सीतापुर। नगर से होकर गुजरने वाले NH-43 की बदहाल स्थिति ने राहगीरों और वाहन चालकों की परेशानी बढ़ा दी है। सोनतराई से सुर तक करीब 3 किलोमीटर लंबा हिस्सा जगह-जगह बड़े गड्ढों, उखड़ी गिट्टी और कीचड़ से जूझ रहा है। बारिश के बाद स्थिति और ज्यादा खराब हो जाती है। सड़क पर जमा पानी के कारण गड्ढों की गहराई दिखाई नहीं देती, जिससे वाहन चालकों के लिए हादसे का खतरा लगातार बना हुआ है। कांकेर स्वास्थ्य व्यवस्था : नाव में दम तोड़ती गर्भवती! सिस्टम की ऐसी तस्वीर क्यों?
यह मार्ग सीतापुर नगर का मुख्य और व्यस्त रास्ता माना जाता है। दिनभर इस सड़क पर दोपहिया, चारपहिया, यात्री वाहनों के साथ भारी वाहनों की आवाजाही होती है। ऐसे में सड़क की खराब स्थिति ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से सड़क की हालत खराब है, लेकिन जिम्मेदार विभाग की ओर से स्थायी समाधान नहीं किया गया है।
NH-43 में 3 किलोमीटर सड़क पर गड्ढे ही गड्ढे
सोनतराई से सुर के बीच NH-43 के कई हिस्सों में डामर उखड़ चुकी है। कहीं बड़े गड्ढे हैं तो कहीं सड़क की गिट्टी बाहर निकल आई है। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी भर जाने से स्थिति और खतरनाक हो जाती है।
वाहन चालक जब इस मार्ग से गुजरते हैं तो उन्हें अचानक सामने आए गड्ढों से बचने के लिए वाहन की गति कम करनी पड़ती है। कई जगहों पर एक साथ कई गड्ढे होने के कारण वाहन चालकों को सुरक्षित रास्ता तलाशते हुए आगे बढ़ना पड़ता है।
दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह परेशानी और ज्यादा गंभीर है। सड़क पर कीचड़ और पानी के कारण वाहन के फिसलने का खतरा बना रहता है।

बारिश ने बढ़ाई परेशानी
सीतापुर में बारिश के दौरान NH-43 की स्थिति और खराब हो जाती है। सड़क के गड्ढों में पानी भरने के बाद वाहन चालकों को यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि पानी के नीचे सड़क कितनी गहरी है।
कई बार वाहन चालक गड्ढे से बचने के प्रयास में अचानक वाहन मोड़ते हैं। व्यस्त मार्ग होने के कारण पीछे से आने वाले वाहनों के साथ टक्कर का खतरा भी बढ़ जाता है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक बारिश के दिनों में इस सड़क से गुजरना खास तौर पर मुश्किल हो जाता है। कीचड़ और जलभराव के कारण पैदल चलने वालों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
NH-43 मुख्य मार्ग होने के बावजूद बदहाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि नगर के इतने महत्वपूर्ण मार्ग की हालत आखिर लंबे समय से खराब क्यों बनी हुई है?
NH-43 सीतापुर से होकर गुजरने वाला प्रमुख मार्ग है। इस पर स्थानीय यातायात के अलावा बाहर से आने-जाने वाले वाहनों का दबाव भी रहता है। भारी वाहनों की लगातार आवाजाही के बीच सड़क की मरम्मत नहीं होने से समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क की मरम्मत केवल गड्ढों में थोड़ी बहुत सामग्री डालकर करने के बजाय टिकाऊ तरीके से की जानी चाहिए, ताकि बारिश आते ही सड़क दोबारा खराब न हो।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI)
महिलाओं और बच्चों को ज्यादा परेशानी
सड़क की खराब हालत का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं है। पैदल चलने वाले लोगों को भी कई जगहों पर परेशानी उठानी पड़ती है।
खासकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए कीचड़ और जलभराव वाले हिस्सों से निकलना मुश्किल हो जाता है। दोपहिया वाहन से आने-जाने वाले लोगों को हर समय फिसलने और संतुलन बिगड़ने का डर बना रहता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर छोटे-बड़े गड्ढों की संख्या इतनी ज्यादा है कि सामान्य गति से वाहन चलाना भी मुश्किल हो गया है।
स्कूटी चालकों के लिए हर गड्ढा बनी चुनौती
सड़क की हालत का सबसे ज्यादा असर दोपहिया वाहन चालकों पर दिखाई दे रहा है। कार या बड़े वाहन किसी तरह गड्ढे को पार कर लेते हैं, लेकिन बाइक और स्कूटी चालकों के लिए अचानक सामने आया गड्ढा परेशानी का कारण बन सकता है।
बारिश के बाद पानी से भरे गड्ढे और भी खतरनाक हो जाते हैं। वाहन चालक को अंदाजा नहीं होता कि पानी के नीचे कितना गहरा गड्ढा है। ऐसे में NH-43 का यह हिस्सा वाहन चालकों के लिए रोजाना किसी परीक्षा से कम नहीं रह गया है।
NH-43 सड़क या गड्ढों का ट्रैक?
स्थानीय लोगों की नाराजगी अब मज़ाकिया तंज में भी सामने आने लगी है। लोगों का कहना है कि नगर के अंदर से गुजरने वाली सड़क की हालत देखकर ऐसा लगता है जैसे यह राष्ट्रीय राजमार्ग नहीं, बल्कि गड्ढों का कोई ट्रैक हो।

बारिश के बाद स्थिति और ज्यादा खराब हो जाती है। वाहन चालक सड़क पर चलने के बजाय गड्ढों के बीच सुरक्षित रास्ता तलाशते नजर आते हैं।
इसी वजह से स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि जब यह इतना व्यस्त राष्ट्रीय मार्ग है तो इसकी नियमित मरम्मत और देखरेख की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
हादसे का खतरा बढ़ा
सड़क पर मौजूद गड्ढों और कीचड़ के कारण दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। खासकर रात के समय स्थिति और ज्यादा खतरनाक हो सकती है, क्योंकि अंधेरे में पानी से भरे गड्ढों का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है।
अगर सामने से कोई भारी वाहन आ जाए और दूसरी तरफ गड्ढा हो तो दोपहिया या छोटे वाहन चालक के लिए सुरक्षित रास्ता चुनना चुनौती बन जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की हालत को लेकर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो किसी बड़े हादसे के बाद स्थिति संभालना मुश्किल हो सकता है। NHAI Road Safety जानकारी
NH-43 में जलभराव ने समस्या को और गंभीर बनाया
सिर्फ सड़क के गड्ढे ही समस्या नहीं हैं। कई हिस्सों में बारिश का पानी सड़क पर जमा हो जाता है। जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण पानी लंबे समय तक सड़क पर बना रहता है।
पानी और भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क की ऊपरी परत और तेजी से खराब होने की आशंका रहती है। इसलिए स्थानीय नागरिक केवल गड्ढे भरने की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान भी चाहते हैं।
स्थानीय लोगों ने उठाई आवाज
NH-43 सड़क की बदहाल स्थिति से परेशान स्थानीय नागरिकों ने संबंधित विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि सड़क की मरम्मत में और देरी नहीं होनी चाहिए।

स्थानीय लोगों की मांग है कि सबसे पहले बड़े और खतरनाक गड्ढों को भरा जाए। इसके बाद सड़क की स्थिति का स्थायी समाधान किया जाए और जहां जलभराव हो रहा है, वहां जल निकासी की व्यवस्था सुधारी जाए।
लोगों का कहना है कि किसी बड़े हादसे के बाद विभाग के जागने का इंतजार नहीं किया जा सकता।
जिम्मेदार विभाग से लोगों को कार्रवाई का इंतजार
अब सवाल जिम्मेदार विभाग की कार्रवाई को लेकर है। क्या सड़क की मरम्मत के लिए तत्काल कोई कदम उठाया जाएगा? क्या सोनतराई से सुर के बीच खराब हिस्से की तकनीकी जांच कराई जाएगी? क्या केवल गड्ढे भरकर खानापूर्ति होगी या सड़क की स्थायी मरम्मत की जाएगी?
स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि विभाग बारिश और यातायात की समस्या को देखते हुए जल्द कार्रवाई करेगा।
कब बदलेगी NH-43 की तस्वीर?
सीतापुर के लोगों के लिए NH-43 रोजमर्रा की जरूरत है। व्यापार, नौकरी, स्कूल, अस्पताल और दूसरे जरूरी कामों के लिए बड़ी संख्या में लोग इसी मार्ग से आते-जाते हैं।
ऐसे में सड़क की खराब स्थिति सीधे आम लोगों की परेशानी से जुड़ी हुई है। फिलहाल लोगों की नजर इस बात पर है कि सोनतराई से सुर के बीच करीब 3 किलोमीटर सड़क की मरम्मत कब शुरू होती है।
अगर जल्द काम शुरू नहीं हुआ तो बारिश के साथ गड्ढे और गहरे हो सकते हैं और सड़क पर जलभराव की समस्या भी बढ़ सकती है।
बड़ा सवाल: हादसे के बाद जागेगा विभाग या पहले?
सीतापुर में NH-43 की मौजूदा स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है। जब सड़क पर रोजाना बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं, तब उसकी नियमित देखरेख और समय पर मरम्मत क्यों नहीं हो रही? क्या गड्ढों की मरम्मत के लिए किसी योजना पर काम चल रहा है? जलभराव रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?

इन सवालों का जवाब अब संबंधित विभाग की कार्रवाई से ही मिलेगा। फिलहाल सीतापुर के लोगों की मांग साफ है—गड्ढों से राहत चाहिए, सुरक्षित सड़क चाहिए और वह भी हादसा होने से पहले।
बारिश के मौसम में NH-43 की बदहाल तस्वीर ने व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस व्यस्त मार्ग को कब तक गड्ढों, कीचड़ और जलभराव से राहत दिलाता है।
