खरसिया सड़क निर्माण पर सरकार से 3 बड़े सवाल, 26 करोड़ की सड़क पर कांग्रेस का वार

खरसिया सड़क निर्माण

खरसिया सड़क निर्माण को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। 26 करोड़ की सड़क बजट से बाहर होने और काम शुरू न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।

खरसिया सड़क निर्माण पर क्यों गरमाया मामला?

रायगढ़, 17 अगस्त। जिले के खरसिया विधानसभा क्षेत्र में खरसिया सड़क निर्माण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। जिला कांग्रेस कमेटी रायगढ़ ग्रामीण के प्रवक्ता तारेन्द्र डनसेना ने राज्य सरकार और लोक निर्माण विभाग पर जनता को विकास कार्यों के नाम पर गुमराह करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ‘सुशासन तिहार 2025’ के दौरान ग्रामीणों से सड़क और विकास कार्यों के लिए आवेदन लिए गए थे, लेकिन एक साल बाद भी कई कार्य धरातल पर शुरू नहीं हो सके हैं। UGC NET री-एग्जाम: 3 विषयों की परीक्षा रद्द, सितंबर में फिर पेपर

डनसेना ने सरकारी पत्राचार और लोक निर्माण विभाग से संबंधित दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि कुछ सड़क निर्माण कार्य पहले बजट में शामिल थे, लेकिन बाद में उन्हें बजट से हटा दिया गया। अब इन कार्यों के लिए अनुपूरक बजट में राशि शामिल करने की प्रक्रिया का हवाला दिया जा रहा है।

कांग्रेस का कहना है कि खरसिया सड़क निर्माण को लेकर जनता लंबे समय से उम्मीद लगाए बैठी है। ऐसे में सरकार को साफ बताना चाहिए कि जिन सड़कों के लिए आवेदन लिए गए थे, उनका क्या हुआ और निर्माण कार्य कब शुरू होगा।

राबर्टसन-डूमरपाली-भालूनारा सड़क पर बड़ा सवाल

खरसिया सड़क निर्माण के मुद्दे में सबसे ज्यादा चर्चा राबर्टसन-डूमरपाली-भालूनारा मार्ग की हो रही है। कांग्रेस प्रवक्ता तारेन्द्र डनसेना के मुताबिक ग्राम बड़े डूमरपाली के गुलशन कुमार और ग्राम नवागांव के रामेश्वर प्रसाद ने ‘सुशासन तिहार 2025’ के दौरान भालूनारा से राबर्टसन रेलवे स्टेशन/साइडिंग तक सड़क निर्माण की मांग की थी।

लोक निर्माण विभाग की ओर से दिए गए जवाब का हवाला देते हुए डनसेना ने कहा कि राबर्टसन-डूमरपाली-भालूनारा मार्ग का निर्माण कार्य बजट वर्ष 2023-24 में शामिल था, लेकिन अब इसे बजट से विलोपित किया जा चुका है।

डनसेना के अनुसार इस सड़क की लंबाई करीब 7.50 किलोमीटर है और अनुमानित लागत करीब 26 करोड़ रुपये बताई गई है। उनके अनुसार विभाग की ओर से इसे प्रथम अनुपूरक बजट 2025-26 में शामिल करने का प्रस्ताव भेजे जाने की जानकारी दी गई है।

यही वजह है कि खरसिया सड़क निर्माण को लेकर कांग्रेस ने सरकार से सवाल पूछा है कि जब सड़क पहले बजट में शामिल थी, तो फिर उसे बजट से हटाने की जरूरत क्यों पड़ी?

26 करोड़ की सड़क बजट से बाहर क्यों हुई?

खरसिया सड़क निर्माण के बीच 26 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली सड़क का बजट से बाहर होना कांग्रेस के लिए बड़ा मुद्दा बन गया है।

तारेन्द्र डनसेना का कहना है कि अगर किसी सड़क को बजट में शामिल किया गया था, तो उसके बाद उसे हटाने का कारण जनता को बताया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने सड़क के लिए आवेदन किया था। विभागीय स्तर पर सड़क का प्रस्ताव भी सामने आया। इसके बावजूद अब अनुपूरक बजट में राशि शामिल करने की प्रक्रिया की बात कही जा रही है।

कांग्रेस पूछ रही है कि आखिर सड़क निर्माण की प्रक्रिया इतनी लंबी क्यों हो रही है?

ग्रामीण इलाकों में सड़क सिर्फ आने-जाने का साधन नहीं होती। सड़क का सीधा असर स्कूल जाने वाले बच्चों, किसानों, मरीजों, छोटे व्यापारियों और रोजमर्रा के कामकाज पर पड़ता है। इसलिए खरसिया सड़क निर्माण का मुद्दा स्थानीय लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

खरसिया की इन सड़कों पर भी उठे सवाल

तारेन्द्र डनसेना ने खरसिया क्षेत्र की कई अन्य सड़कों का भी उल्लेख किया है। उन्होंने इन कार्यों की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है।

खरसिया सड़क निर्माण : तारेन्द्र डनसेना
  • सिंघनपुर से बरभौना-चंद्रशेखरपुर-ऐडू मार्ग — 22.30 किमी, अनुमानित लागत ₹15.60 करोड़।
  • सोनबरसा से कलमी मार्ग — 4.50 किमी, अनुमानित लागत ₹4.50 करोड़।
  • नवागांव से रजघट्टा मार्ग — 2 किमी, अनुमानित लागत ₹2 करोड़।
  • गोरपार से खड़गांव मार्ग — 2.10 किमी, अनुमानित लागत ₹2.005 करोड़।
  • सोनबरसा पहुंच मार्ग — 1.50 किमी, अनुमानित लागत ₹1.50 करोड़।

कांग्रेस के अनुसार इन सड़कों को लेकर भी विभागीय स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने की बात कही गई है। पार्टी ने मांग की है कि सरकार बताए कि इन सड़कों के लिए अभी तक क्या कार्रवाई हुई है।

खरसिया सड़क निर्माण से जुड़े इन सभी मामलों को लेकर अब जनता भी यह जानना चाहती है कि प्रस्ताव किस स्तर पर हैं और निर्माण की स्थिति क्या है।

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‘सुशासन तिहार’ के आवेदन का क्या हुआ?

खरसिया सड़क निर्माण को लेकर कांग्रेस का सबसे बड़ा सवाल ‘सुशासन तिहार 2025’ में लिए गए आवेदनों को लेकर है।

खरसिया सड़क निर्माण

डनसेना ने कहा कि सरकार ने ग्रामीणों से सड़क और विकास कार्यों के लिए आवेदन लिए थे। लोगों ने अपनी समस्या सरकार तक पहुंचाई। लेकिन अगर आवेदन लेने के बाद भी एक साल तक काम शुरू नहीं होता है, तो सरकार को इसकी स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।

कांग्रेस का सवाल है कि इन आवेदनों पर क्या कार्रवाई हुई? कितने प्रस्ताव आगे भेजे गए? कितने प्रस्ताव बजट में शामिल हुए? कितने प्रस्ताव बाद में हटा दिए गए? इन सवालों के जवाब से ही यह साफ होगा कि ‘सुशासन तिहार’ में दिए गए आवेदनों का जमीन पर कितना असर हुआ।

यही वजह है कि खरसिया सड़क निर्माण अब केवल सड़क का मुद्दा नहीं बल्कि सरकारी कामकाज की गति को लेकर भी सवाल बन गया है।

सरकार से पूछे तीन सीधे सवाल

तारेन्द्र डनसेना ने सरकार के सामने कई सवाल रखे हैं। इनमें तीन सवाल प्रमुख हैं।

पहला सवाल: अगर राबर्टसन-डूमरपाली-भालूनारा मार्ग वर्ष 2023-24 के बजट में शामिल था, तो इसे बाद में बजट से हटाने की जरूरत क्यों पड़ी?

दूसरा सवाल: ‘सुशासन तिहार 2025’ के दौरान ग्रामीणों से सड़क निर्माण के आवेदन लेने के बाद भी एक साल तक निर्माण कार्य क्यों शुरू नहीं हुआ?

तीसरा सवाल: जिन सड़कों के लिए अनुपूरक बजट में राशि शामिल करने का प्रस्ताव भेजा गया है, उनकी वर्तमान स्थिति क्या है और काम कब शुरू होगा?

कांग्रेस का कहना है कि जनता को केवल प्रस्ताव और सरकारी प्रक्रिया की जानकारी नहीं चाहिए। लोगों को यह भी पता होना चाहिए कि सड़क का काम कब शुरू होगा।

खरसिया सड़क निर्माण

इसी सवाल को लेकर खरसिया सड़क निर्माण का मुद्दा अब राजनीतिक रूप से भी तेज होता दिखाई दे रहा है।

विधायक उमेश पटेल का भी जिक्र

तारेन्द्र डनसेना ने खरसिया विधायक उमेश पटेल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विधायक क्षेत्र की सड़कों और विकास कार्यों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाते रहे हैं।

कांग्रेस का आरोप है कि इसके बावजूद स्वीकृत सड़क कार्यों को बजट से हटाया जाना क्षेत्रवासियों के हित में नहीं है।

डनसेना ने कहा कि खरसिया सड़क निर्माण को लेकर क्षेत्र की जनता की मांगों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। यदि सड़कें जरूरी हैं और उनके लिए प्रस्ताव पहले ही तैयार किए जा चुके हैं, तो सरकार को आगे की प्रक्रिया में तेजी लानी चाहिए।

निर्माण शुरू नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी

खरसिया सड़क निर्माण को लेकर कांग्रेस ने अब आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

तारेन्द्र डनसेना ने कहा कि यदि बजट से हटाए गए सड़क कार्यों के लिए जल्द राशि स्वीकृत कर निर्माण शुरू नहीं कराया गया, तो कांग्रेस क्षेत्र की जनता के साथ आंदोलन करेगी।

उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण के मुद्दे पर कांग्रेस आगे भी सरकार और प्रशासन के सामने आवाज उठाती रहेगी।

यानी आने वाले दिनों में खरसिया सड़क निर्माण का मुद्दा सड़क से निकलकर राजनीतिक आंदोलन का रूप ले सकता है।

सवाल सड़क का है या सरकारी प्रक्रिया का?

खरसिया सड़क निर्माण के पूरे मामले को देखें तो सबसे बड़ा सवाल सरकारी प्रक्रिया की गति को लेकर है।

एक तरफ ग्रामीणों ने आवेदन दिया। दूसरी तरफ विभागीय जवाब सामने आया। कुछ सड़कें बजट में शामिल होने की बात सामने आई। इसके बाद कुछ कार्यों के बजट से हटाए जाने की जानकारी दी गई। अब अनुपूरक बजट में राशि शामिल करने का प्रस्ताव बताया जा रहा है।

ऐसे में आम लोगों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि सड़क आखिर बनेगी कब?

कांग्रेस इसी सवाल को लेकर सरकार पर दबाव बना रही है। पार्टी का आरोप है कि जनता से आवेदन लेकर उन्हें विकास की उम्मीद दी गई, लेकिन कई मामलों में काम अभी भी जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा है।

हालांकि, पूरे मामले में सरकार और लोक निर्माण विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी जरूरी है। यदि बजट से सड़क हटाने के पीछे कोई प्रशासनिक, तकनीकी या वित्तीय कारण है, तो उसकी जानकारी जनता को दी जानी चाहिए।

क्योंकि खरसिया सड़क निर्माण का मामला सीधे लोगों की सुविधा से जुड़ा है।

7.50 किलोमीटर सड़क पर 26 करोड़ का प्रस्ताव, अब आगे क्या?

राबर्टसन-डूमरपाली-भालूनारा मार्ग करीब 7.50 किलोमीटर लंबा बताया गया है। इसकी अनुमानित लागत करीब 26 करोड़ रुपये है। कांग्रेस प्रवक्ता के अनुसार अब इस सड़क को प्रथम अनुपूरक बजट 2025-26 में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा गया है।

अब नजर इस बात पर है कि बजट प्रक्रिया में इस सड़क का क्या होता है। अगर राशि स्वीकृत होती है, तो निर्माण की अगली प्रक्रिया शुरू हो सकती है। लेकिन अगर मामला फिर आगे खिसकता है, तो कांग्रेस के पास सरकार को घेरने का एक और मुद्दा तैयार रहेगा।

ग्रामीणों के लिए भी यही सबसे अहम सवाल है कि कागजों में चल रही प्रक्रिया सड़क पर कब दिखाई देगी। इसी कारण खरसिया सड़क निर्माण पर उठ रहे सवाल आने वाले दिनों में और तेज हो सकते हैं।

खरसिया सड़क निर्माण

खरसिया की सड़कों पर सरकार से जवाब की मांग

कांग्रेस ने सरकार और लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि खरसिया क्षेत्र की जिन सड़कों को लेकर प्रस्ताव दिए गए हैं, उनकी स्थिति सार्वजनिक की जाए।

किस सड़क के लिए कितनी राशि प्रस्तावित है, किस सड़क का काम बजट में है, किसे हटाया गया है और किसे अनुपूरक बजट में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा गया है—इन सभी सवालों का जवाब जनता के सामने आना चाहिए।

कांग्रेस का कहना है कि खरसिया सड़क निर्माण को लेकर केवल कागजी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। लोगों को जमीन पर काम चाहिए। सरकार अगर सड़कवार स्थिति, बजट और निर्माण की समयसीमा स्पष्ट करती है, तो जनता के कई सवालों का जवाब मिल सकता है।

छत्तीसगढ़ लोक निर्माण विभाग (PWD):Chhattisgarh PWD की आधिकारिक वेबसाइट

छत्तीसगढ़ शासन की आधिकारिक वेबसाइट:Chhattisgarh Government

जनता के सामने सबसे बड़ा सवाल—सड़क कब बनेगी?

खरसिया सड़क निर्माण को लेकर फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—सड़क कब बनेगी?

ग्रामीणों ने आवेदन किया। विभागीय स्तर पर प्रस्ताव सामने आए। बजट का जिक्र हुआ। फिर बजट से हटाने और अनुपूरक बजट में राशि शामिल करने की प्रक्रिया की बात सामने आई। लेकिन जनता को आखिर कागज नहीं, जमीन पर सड़क चाहिए।

कांग्रेस इसी सवाल को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बनाने की तैयारी में है। तारेन्द्र डनसेना ने साफ कहा है कि यदि जल्द राशि स्वीकृत कर निर्माण शुरू नहीं कराया गया, तो कांग्रेस क्षेत्र की जनता के साथ आंदोलन करेगी।

अब सरकार और लोक निर्माण विभाग के जवाब पर सबकी नजर है। खरसिया सड़क निर्माण को लेकर सरकार अगर जल्द स्थिति साफ करती है और निर्माण की दिशा में कदम उठाती है, तो ग्रामीणों को राहत मिल सकती है। वहीं अगर देरी जारी रहती है, तो यह मुद्दा आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है।

खरसिया सड़क निर्माण को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार और लोक निर्माण विभाग से सीधे जवाब मांगा है। 26 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली राबर्टसन-डूमरपाली-भालूनारा सड़क समेत कई अन्य मार्गों का मुद्दा सामने आया है।

कांग्रेस प्रवक्ता तारेन्द्र डनसेना का आरोप है कि ‘सुशासन तिहार 2025’ के दौरान ग्रामीणों से सड़क निर्माण और विकास कार्यों के आवेदन लिए गए, लेकिन कई कार्य एक साल बाद भी जमीन पर शुरू नहीं हुए।

अब सरकार और विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि बजट में शामिल किए गए सड़क कार्यों को बाद में क्यों हटाया गया और अनुपूरक बजट में राशि शामिल करने की प्रक्रिया कितनी आगे बढ़ी है।

आखिर खरसिया सड़क निर्माण का सवाल सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का नहीं है। यह उन ग्रामीणों की जरूरत से जुड़ा है, जो सड़क बनने का इंतजार कर रहे हैं।

नोट: इस खबर में सरकार और लोक निर्माण विभाग पर लगाए गए आरोप कांग्रेस प्रवक्ता तारेन्द्र डनसेना के बयान तथा उनके द्वारा बताए गए विभागीय दस्तावेजों पर आधारित हैं। संबंधित विभाग या राज्य सरकार का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी रिपोर्ट में शामिल किया जाना चाहिए।

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