कोरबा अवैध कबाड़ कारोबार को लेकर पुलिस शिकायत हुई है। चोरी के लोहे की खरीद-बिक्री, GST रिकॉर्ड और कथित गोदाम की जांच की मांग की गई है।
कोरबा। जिले में कोरबा अवैध कबाड़ कारोबार को लेकर एक शिकायत ने पुलिस और प्रशासन के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता गुलाम मेमन, पिता हाजी अमीन मेमन, निवासी मेन रोड, पावर हाउस रोड, कोरबा ने पुलिस अधीक्षक के समक्ष शिकायत देकर रवि साहू, राजेश साहू और दीपक साहू सहित अन्य लोगों के खिलाफ जांच और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
VB-G RAM G में बड़ा खेल! 125 दिन रोजगार, राज्यों पर बढ़ा बोझ शिकायतकर्ता का कहना है कि कथित तौर पर शासकीय प्रतिष्ठानों और अन्य स्थानों से चोरी किया गया लोहा कबाड़ के जरिए खरीदा और आगे बेचा जा रहा है।

शिकायतकर्ता ने इस मामले की जानकारी जिला कलेक्टर कोरबा और जिला GST विभाग को भी देने की बात कही है। शिकायत में कथित कोरबा अवैध कबाड़ कारोबार की सप्लाई चेन, खरीद-बिक्री, बिलिंग व्यवस्था और उन स्रोतों की जांच की मांग की गई है, जहां से कथित तौर पर लोहा और अन्य कबाड़ खरीदा जाता है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोप फिलहाल आरोप हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस, GST विभाग या अन्य संबंधित एजेंसी की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
कोरबा अवैध कबाड़ कारोबार को लेकर क्या है शिकायत?
शिकायतकर्ता के अनुसार, कोरबा में कथित कोरबा अवैध कबाड़ कारोबार से जुड़े कुछ लोग अलग-अलग क्षेत्रों में दुकान और गोदाम संचालित कर रहे हैं। आरोप लगाया गया है कि इन स्थानों पर लोहे सहित अन्य धातु का कबाड़ लाया जाता है और उसे काटकर या अलग-अलग हिस्सों में तैयार करने के बाद आगे भेजा जाता है।
शिकायत में दावा किया गया है कि कथित रूप से चोरी किया गया लोहा कबाड़ कारोबार के माध्यम से खरीदा जाता है। इसके बाद इसे रायगढ़ सहित अन्य क्षेत्रों में स्थित स्पंज आयरन फैक्ट्रियों तक भेजे जाने का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि यदि किसी कारोबारी द्वारा माल खरीदा जाता है और बाद में वही माल किसी दूसरे कारोबारी या फैक्ट्री को बेचा जाता है, तो उसकी खरीद का रिकॉर्ड भी मौजूद होना चाहिए। इसी बिंदु को लेकर शिकायत में GST विभाग से दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की गई है।
कोरबा अवैध कबाड़ कारोबार : खरीद का बिल कहां है, शिकायतकर्ता ने उठाया सवाल
कोरबा अवैध कबाड़ कारोबार को लेकर शिकायत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा खरीद और बिक्री के बिल से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि माल बेचते समय GST से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत किए जाते हैं, लेकिन माल खरीदने के समय कथित रूप से जरूरी बिल या खरीद संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाते।
शिकायतकर्ता ने इसी आधार पर जांच की मांग की है कि आखिर कबाड़ कारोबारी जिस माल को आगे बेच रहे हैं, वह उनके पास आया कहां से?
यदि कोई लोहा वैध तरीके से खरीदा गया है तो उसकी खरीद का रिकॉर्ड, बिल, परिवहन दस्तावेज और संबंधित कारोबारी जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए। यदि किसी माल की खरीद का रिकॉर्ड नहीं है तो उसकी वास्तविक उत्पत्ति की जांच करना जरूरी हो सकता है।
हालांकि, किसी कारोबारी के पास बिल या दस्तावेज नहीं होने का अंतिम निष्कर्ष जांच के बिना नहीं निकाला जा सकता। इसी वजह से शिकायतकर्ता ने पुलिस के साथ-साथ GST विभाग से भी मामले की जांच की मांग की है।
कोरबा अवैध कबाड़ कारोबार : सप्लाई चेन की जांच की मांग
शिकायतकर्ता का कहना है कि केवल कबाड़ गोदाम या दुकान की जांच से पूरा मामला स्पष्ट नहीं होगा। कोरबा अवैध कबाड़ कारोबार की वास्तविक स्थिति समझने के लिए माल के पूरे रास्ते की जांच जरूरी है।
मसलन, माल कहां से आया? माल की खरीद किस व्यक्ति या संस्था से की गई? माल किस वाहन से लाया गया और उसका रिकॉर्ड मौजूद है या नहीं?किस जगह पर माल का वजन किया गया?माल को किस गोदाम में रखा गया था? बिल किस व्यक्ति या संस्था के नाम पर बनाया गया?बाद में यह माल किस कारोबारी को बेचा गया? आखिर माल किस फैक्ट्री तक पहुंचाया गया?
इन सवालों के जवाब मिलने से कथित कबाड़ कारोबार की पूरी सप्लाई चेन सामने आ सकती है।

शिकायतकर्ता ने इसी तरह की विस्तृत जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि कहीं चोरी का माल कबाड़ के माध्यम से खपाया जा रहा है तो केवल चोरी करने वाले व्यक्ति तक जांच सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि चोरी के माल को खरीदने और आगे बेचने वालों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।
TP नगर के राजू होटल के पास गोदाम का उल्लेख
शिकायत में कोरबा अवैध कबाड़ कारोबार से जुड़े एक कथित गोदाम का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, TP नगर स्थित राजू होटल के पास एक स्थान पर कथित रूप से कबाड़ एकत्र किया जाता है और ट्रकों के माध्यम से बाहर भेजे जाने का आरोप है।
शिकायतकर्ता ने इस स्थान की जांच कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि यदि समय रहते जांच की जाए तो वहां से कथित रूप से चोरी का माल या उसकी सप्लाई से जुड़े दस्तावेज मिल सकते हैं।
लेकिन इस दावे की भी अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि उक्त स्थान पर किस प्रकार का कारोबार संचालित हो रहा है और वहां रखे माल का स्रोत क्या है।
किसी भी गोदाम में मौजूद लोहे या कबाड़ को चोरी का माल मानने से पहले उसके दस्तावेज, मालिकाना हक, खरीद रिकॉर्ड और अन्य संबंधित कागजात की जांच जरूरी होगी।
कोरबा अवैध कबाड़ कारोबार : चोरी के लोहे को खपाने का आरोप
शिकायत में कोरबा अवैध कबाड़ कारोबार को चोरी की घटनाओं से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि शहर और ग्रामीण इलाकों में लोहे की चोरी की घटनाओं को लेकर लोगों में चिंता है और चोरी किए गए माल को कबाड़ के माध्यम से खपाए जाने की आशंका है। खासकर शासकीय प्रतिष्ठानों, औद्योगिक क्षेत्रों और खदानों से संबंधित लोहे की चोरी को लेकर शिकायत में जांच की मांग की गई है।
अगर जांच में यह सामने आता है कि चोरी का माल किसी कबाड़ कारोबारी तक पहुंचा और वहां से आगे बेचा गया, तो पुलिस के लिए पूरे नेटवर्क की पहचान करना महत्वपूर्ण होगा। वहीं अगर माल वैध स्रोत से खरीदा गया पाया जाता है तो शिकायत में लगाए गए इस आरोप की स्थिति भी स्पष्ट हो सकेगी।
यही वजह है कि मामले में दस्तावेजों के साथ-साथ मौके की जांच को भी अहम माना जा रहा है।
बालको और खदान क्षेत्रों से चोरी के भी आरोप
शिकायत में बालको क्षेत्र और खदानों से संबंधित कथित चोरी का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कुछ स्थानों से निकलने वाला लोहा कथित कबाड़ कारोबार के माध्यम से आगे खपाया जा सकता है।
यह आरोप भी फिलहाल जांच के स्तर पर है। किसी भी खदान, औद्योगिक प्रतिष्ठान या शासकीय संस्था से चोरी की पुष्टि संबंधित संस्था के रिकॉर्ड, पुलिस जांच, CCTV फुटेज, सुरक्षा व्यवस्था, स्टॉक रजिस्टर और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकती है।
कोरबा अवैध कबाड़ कारोबार की जांच यदि आगे बढ़ती है तो पुलिस के सामने यह भी जांच का विषय हो सकता है कि अलग-अलग इलाकों से आने वाले लोहे का स्रोत क्या है।
मानिकपुर और कोतवाली क्षेत्र को लेकर भी शिकायत
शिकायत में मानिकपुर पुलिस चौकी और थाना कोतवाली क्षेत्र में चोरी के मामलों में कथित संरक्षण मिलने के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने इस संबंध में भी जांच की मांग की है।
यह आरोप पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है, लेकिन इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए जांच एजेंसी के लिए यह जरूरी होगा कि यदि शिकायत में किसी विशेष घटना, तारीख, वाहन, व्यक्ति या मामले का उल्लेख है तो उसके रिकॉर्ड की जांच की जाए।
यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी पर किसी तरह की लापरवाही या मिलीभगत का आरोप है तो उसकी जांच अलग से की जा सकती है। वहीं यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।
कोरबा अवैध कबाड़ कारोबार: मोबाइल और WhatsApp रिकॉर्ड की जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने कोरबा अवैध कबाड़ कारोबार से जुड़े लोगों के कथित मोबाइल फोन और WhatsApp कॉल विवरण की जांच की मांग भी की है।
हालांकि, किसी व्यक्ति के निजी मोबाइल या डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कानूनी प्रक्रिया और सक्षम अनुमति के तहत ही की जा सकती है। यदि जांच एजेंसी को प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार मिलता है तो कानून के मुताबिक उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा सकती है।
शिकायतकर्ता का मानना है कि यदि कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा है तो केवल एक-दो लोगों की पूछताछ से पूरी तस्वीर सामने नहीं आएगी। कथित खरीददार, विक्रेता, वाहन चालक, गोदाम संचालक और अंतिम खरीदार तक की कड़ी जोड़ना जरूरी होगा।
ट्रकों से बाहर भेजे जाने वाले माल की भी जांच जरूरी
कोरबा अवैध कबाड़ कारोबार की शिकायत में ट्रकों के जरिए कबाड़ को दूसरे जिलों में भेजे जाने का भी आरोप है। ऐसे में जांच के दौरान परिवहन से जुड़े दस्तावेज महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
किस वाहन से माल गया? वाहन किसके नाम पर है? माल कहां से लोड हुआ? कहां पहुंचाया गया? किस बिल या दस्तावेज के आधार पर भेजा गया? वाहन में कितनी मात्रा में माल था? इन सवालों का रिकॉर्ड यदि उपलब्ध है तो जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
रायगढ़ या अन्य जिलों की फैक्ट्रियों तक माल पहुंचने के दावे की भी संबंधित रिकॉर्ड से जांच की जा सकती है। यदि वास्तव में किसी विशेष फैक्ट्री को माल भेजा गया है तो वहां के खरीद रिकॉर्ड से भी इसकी पुष्टि या खंडन संभव हो सकता है।
कोरबा अवैध कबाड़ कारोबार में GST विभाग की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण?
शिकायतकर्ता ने कोरबा अवैध कबाड़ कारोबार के मामले में GST विभाग से भी जांच की मांग की है। इसका कारण खरीद-बिक्री के दस्तावेज और टैक्स रिकॉर्ड बताए गए हैं।
यदि किसी कारोबारी ने लगातार बड़ी मात्रा में लोहा खरीदा और बेचा है तो उसके व्यापारिक रिकॉर्ड में संबंधित लेन-देन दर्ज होने की उम्मीद होती है। खरीद और बिक्री के दस्तावेजों में अंतर, बिलों की जानकारी, माल की मात्रा और भुगतान के रिकॉर्ड की जांच से कारोबार की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।
हालांकि GST कानून से जुड़े किसी भी उल्लंघन का निष्कर्ष संबंधित विभाग की जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।
इसलिए फिलहाल यह कहना उचित होगा कि शिकायतकर्ता ने टैक्स संबंधी अनियमितता की आशंका जताई है और विभाग से इसकी जांच की मांग की है।
पुलिस के सामने क्या-क्या जांच के बिंदु?
कोरबा अवैध कबाड़ कारोबार की शिकायत पर पुलिस जांच करती है तो कई बिंदुओं पर जानकारी जुटाई जा सकती है।

पहला बिंदु होगा कथित कबाड़ गोदामों का भौतिक सत्यापन।
दूसरा, वहां मौजूद माल के दस्तावेजों की जांच।
तीसरा, माल खरीदने और बेचने वाले लोगों की जानकारी।
चौथा, परिवहन में इस्तेमाल वाहनों की जानकारी।
पांचवां, चोरी की रिपोर्ट से किसी बरामद माल का मिलान।
छठा, औद्योगिक और शासकीय संस्थानों के स्टॉक रिकॉर्ड की जांच।
सातवां, CCTV और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों की जांच।
आठवां, यदि कानून के तहत जरूरी आधार मिलता है तो डिजिटल और वित्तीय लेन-देन की जांच।
इन सभी बिंदुओं की जांच के बाद ही यह पता चल सकता है कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं।
शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष जांच की मांग की
शिकायतकर्ता गुलाम मेमन ने पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने रवि साहू, राजेश साहू और दीपक साहू सहित अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग की है।
साथ ही उन्होंने कहा है कि कोरबा अवैध कबाड़ कारोबार की जांच केवल कुछ दुकानों या गोदामों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जिन स्रोतों से माल कथित तौर पर खरीदा जाता है, वहां तक जांच पहुंचनी चाहिए।
शिकायतकर्ता ने पुलिस प्रशासन को जांच में सहयोग करने की बात भी कही है।
उनका कहना है कि यदि किसी गोदाम में चोरी का माल मौजूद है तो समय रहते जांच और कार्रवाई से उसे बरामद किया जा सकता है।
कोरबा अवैध कबाड़ कारोबार में क्या पुलिस कार्रवाई करेगी?
फिलहाल इस मामले में लगाए गए आरोपों की पुलिस स्तर पर जांच और सत्यापन होना बाकी है। शिकायत मिलना अपने आप में आरोपों की पुष्टि नहीं है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में बताए गए स्थानों पर कोई अवैध गतिविधि चल रही है या नहीं।
यदि जांच में चोरी का माल मिलता है या किसी अपराध से संबंधित ठोस साक्ष्य सामने आते हैं तो पुलिस कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकती है। वहीं यदि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलते हैं तो उसकी जानकारी भी जांच प्रक्रिया के बाद सामने आएगी।
इसी तरह GST विभाग के स्तर पर भी यह देखा जा सकता है कि संबंधित कारोबारियों के खरीद-बिक्री रिकॉर्ड में कोई गड़बड़ी है या नहीं।
शिकायत से उठे कई बड़े सवाल
इस पूरे मामले ने कोरबा अवैध कबाड़ कारोबार को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं।
कबाड़ कारोबार में खरीदे गए लोहे का पूरा रिकॉर्ड मौजूद है या नहीं? हर बड़ी खरीद के साथ वैध बिल और जरूरी दस्तावेज दिए गए या नहीं? शासकीय संस्थानों से चोरी होने वाले लोहे की कोई सप्लाई चेन सामने आई या नहीं?
चोरी का माल कबाड़ के जरिए दूसरे जिलों तक पहुंचाया जा रहा है या नहीं? कबाड़ ले जाने वाले वाहनों और उनके दस्तावेजों की नियमित जांच होती है या नहीं?कबाड़ गोदाम में रखे माल के असली स्रोत का पता लगाया जाता है या नहीं? GST रिकॉर्ड और गोदाम में मौजूद वास्तविक स्टॉक में कोई अंतर है या नहीं? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ पाएंगे।
कोरबा अवैध कबाड़ कारोबार : शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि बाकी
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि कोरबा अवैध कबाड़ कारोबार को लेकर शिकायतकर्ता ने जो आरोप लगाए हैं, वे अभी जांच के अधीन हैं। आरोपों को तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
रवि साहू, राजेश साहू और दीपक साहू के खिलाफ लगाए गए आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित व्यक्तियों का पक्ष सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना जरूरी होगा।
इसी तरह पुलिस, जिला प्रशासन और GST विभाग की ओर से आधिकारिक जवाब या जांच की स्थिति सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और साफ होगी।
कोरबा जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट
GST ई-वे बिल की आधिकारिक जानकारी
आगे की जांच से साफ होगी तस्वीर
कोरबा अवैध कबाड़ कारोबार से जुड़े इस मामले में सबसे अहम बात अब जांच होगी। यदि शिकायत में बताए गए गोदाम, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड, वाहनों, फैक्ट्रियों और कथित चोरी की घटनाओं के बीच कोई कड़ी मिलती है तो मामला गंभीर रूप ले सकता है।
दूसरी ओर, यदि जांच में माल वैध तरीके से खरीदा गया पाया जाता है और दस्तावेज सही मिलते हैं तो शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।
पुलिस और GST विभाग के स्तर पर अलग-अलग पहलुओं की जांच होने पर यह पता चल सकेगा कि मामला केवल सामान्य कबाड़ कारोबार से जुड़ा है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।
फिलहाल शिकायतकर्ता ने पुलिस अधीक्षक, जिला प्रशासन और GST विभाग से समन्वित जांच की मांग की है। कोरबा अवैध कबाड़ कारोबार से जुड़े आरोपों की सच्चाई अब जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही सामने आएगी।
कोरबा में कथित कोरबा अवैध कबाड़ कारोबार को लेकर सामने आई शिकायत ने चोरी के लोहे, कबाड़ गोदाम, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड, GST दस्तावेज और परिवहन व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। शिकायतकर्ता ने रवि साहू, राजेश साहू और दीपक साहू सहित अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग की है।
शिकायत में TP नगर के राजू होटल के पास कथित कबाड़ गोदाम, बालको क्षेत्र, खदानों और अन्य इलाकों से जुड़े आरोपों का उल्लेख किया गया है। साथ ही मानिकपुर पुलिस चौकी और कोतवाली क्षेत्र में कथित संरक्षण के आरोप भी लगाए गए हैं।
हालांकि, कोरबा अवैध कबाड़ कारोबार से जुड़े इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। इसलिए मामले में निष्पक्ष जांच बेहद महत्वपूर्ण है। पुलिस यह जांच सकती है कि चोरी की घटनाओं और कबाड़ कारोबार के बीच कोई संबंध है या नहीं। GST विभाग खरीद-बिक्री और टैक्स रिकॉर्ड की जांच कर सकता है। वहीं जिला प्रशासन संबंधित स्थानों और कारोबारी गतिविधियों की जानकारी जुटा सकता है।
आखिर में सवाल यही है कि कबाड़ में आने वाला लोहा वास्तव में कहां से आता है, उसके पास वैध दस्तावेज हैं या नहीं और यदि कोई चोरी का माल है तो वह किस रास्ते से आगे भेजा जाता है। इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की पुलिस एवं GST विभाग स्तर पर जांच और सत्यापन होना बाकी है।
