VB-G RAM G में बड़ा खेल! 125 दिन रोजगार, राज्यों पर बढ़ा बोझ

VB-G RAM G का बड़ा बदलाव! 125 दिन रोजगार, राज्यों पर बोझ

VB-G RAM G में रोजगार की गारंटी 100 से बढ़कर 125 दिन हुई। जानिए 60 दिन खेती ब्रेक, 60:40 फंडिंग और राज्यों पर बढ़ते खर्च का पूरा असर।

रायपुर/दिल्ली। गांवों में रोजगार देने वाली देश की सबसे बड़ी सरकारी व्यवस्था अब बदल गई है। 1 जुलाई 2026 से MGNREGA की जगह VB-G RAM G यानी विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन-ग्रामीण लागू हो गया है। नई व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव रोजगार की गारंटी को लेकर हुआ है। जहां MGNREGA में एक ग्रामीण परिवार को साल में 100 दिन तक रोजगार की गारंटी मिलती थी, वहीं अब यह सीमा बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। यानी कागज पर हर पात्र परिवार को 25 दिन अतिरिक्त रोजगार का अधिकार मिला है।

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लेकिन इस बदलाव के साथ कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। क्या हर परिवार को अपने आप 125 दिन काम मिलेगा? खेती के मौसम में 60 दिन का ब्रेक क्यों रखा गया है? केंद्र और राज्य के बीच पैसे का बंटवारा कैसे होगा? क्या राज्यों पर खर्च का बोझ बढ़ेगा? और सबसे बड़ा सवाल यह है कि पहले जब 100 दिन की गारंटी थी और औसतन करीब 48 दिन ही काम मिल पाया, तो अब 125 दिन की गारंटी जमीन पर कितनी दूर तक पहुंचेगी? VB-G RAM G की असली परीक्षा इन्हीं सवालों के जवाब में छिपी है।

VB-G RAM G से ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव

VB-G RAM G को ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। नई योजना में रोजगार की सीमा 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन की गई है। इसका सीधा मतलब है कि पात्र ग्रामीण परिवारों के पास अब पहले की तुलना में 25 दिन ज्यादा रोजगार पाने की कानूनी गारंटी होगी।

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सरकार का जोर सिर्फ मजदूरी देने पर नहीं है। नई व्यवस्था में गांवों में ऐसे काम कराने की कोशिश की जाएगी, जिनसे लंबे समय तक फायदा मिले। पानी बचाने, जल संरक्षण, गांव के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और रोजगार के स्थायी साधन तैयार करने वाले कामों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।

VB-G RAM G का बड़ा बदलाव! 125 दिन रोजगार

यानी नई व्यवस्था का लक्ष्य सिर्फ यह नहीं है कि मजदूर को कुछ दिनों के लिए काम मिल जाए। कोशिश यह है कि मजदूरी के साथ गांव में ऐसी संपत्ति और सुविधाएं भी तैयार हों, जिनका फायदा आने वाले वर्षों में ग्रामीण परिवारों को मिलता रहे।

100 दिन से बढ़कर 125 दिन रोजगार

MGNREGA के तहत ग्रामीण परिवार को एक साल में 100 दिन तक रोजगार की गारंटी मिलती थी। अब VB-G RAM G में यह सीमा 125 दिन कर दी गई है।

25 दिन की यह अतिरिक्त गारंटी ग्रामीण मजदूर परिवार के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। जिन परिवारों के पास खेती की जमीन नहीं है या जिनकी आमदनी खेती पर पूरी तरह निर्भर नहीं है, उनके लिए अतिरिक्त 25 दिन की मजदूरी घरेलू खर्च चलाने में मददगार हो सकती है।

लेकिन यहां एक बात साफ समझना जरूरी है। 125 दिन की गारंटी का मतलब यह नहीं है कि हर परिवार के खाते में पहले से 125 दिन की मजदूरी तय हो गई है। योजना अभी भी काम की मांग पर आधारित है।

VB-G RAM G का बड़ा बदलाव! 125 दिन रोजगार

यानी परिवार के वयस्क सदस्यों को काम मांगना होगा। काम की मांग के बाद रोजगार देने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसलिए VB-G RAM G में कागज पर 125 दिन की गारंटी और जमीन पर वास्तव में मिले रोजगार के दिनों के बीच का अंतर सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा रहेगा।

क्या हर परिवार को अपने आप 125 दिन काम मिलेगा?

इस सवाल का जवाब है—नहीं। VB-G RAM G के तहत रोजगार अभी भी मांग आधारित व्यवस्था से जुड़ा है। यानी किसी परिवार को सिर्फ इसलिए 125 दिन का काम अपने आप नहीं मिल जाएगा क्योंकि कानून में 125 दिन की गारंटी लिखी गई है।

परिवार के सदस्यों को रोजगार की मांग करनी होगी। इसके बाद उन्हें योजना के तहत काम उपलब्ध कराया जाएगा। इसका मतलब यह है कि 125 दिन एक कानूनी रोजगार गारंटी है, न कि हर परिवार को बिना मांग किए मिलने वाला तय रोजगार पैकेज।

गांवों में इस फर्क को समझना बेहद जरूरी है। अगर किसी परिवार ने 50 दिन काम मांगा और उसे 50 दिन काम मिला, तो यह नहीं कहा जा सकता कि उसे 125 दिन की मजदूरी मिलनी ही थी। इसी तरह अगर किसी परिवार को ज्यादा दिनों तक काम की जरूरत है, तो उसे रोजगार की मांग करनी होगी।

आने वाले समय में योजना की सफलता इसी बात से मापी जाएगी कि कितने परिवारों ने काम मांगा और उनमें से कितने परिवारों को वास्तव में रोजगार मिला।

पुराने आंकड़े बढ़ा रहे हैं नई योजना की चुनौती

VB-G RAM G की सबसे बड़ी परीक्षा पुराने आंकड़ों से जुड़ी है। पिछले करीब 10 साल के आंकड़ों को देखें तो एक परिवार को औसतन साल में करीब 48 दिन ही रोजगार मिलने की बात सामने आती है। वहीं पूरे 100 दिन काम पाने वाले परिवारों की संख्या 10 प्रतिशत से भी कम रही।

यही आंकड़ा अब नई योजना के सामने बड़ा सवाल खड़ा करता है। जब पहले 100 दिन की गारंटी के बावजूद औसतन करीब 48 दिन ही काम मिला, तो अब 125 दिन की नई गारंटी के बाद वास्तव में कितने दिन रोजगार मिलेगा?

अब असली चुनौती पंचायत स्तर पर सामने आएगी। क्या गांवों में पूरे साल 125 दिन रोजगार देने लायक पर्याप्त काम तैयार हो पाएगा? रोजगार की मांग बढ़ने पर क्या हर जरूरतमंद परिवार को लगातार काम मिल सकेगा? और अगर तय बजट से ज्यादा मांग आई, तो अतिरिक्त खर्च का बोझ कौन उठाएगा? इन सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि नई व्यवस्था कागज पर मजबूत है या जमीन पर भी उतनी ही असरदार साबित होती है।

इन सवालों का जवाब अभी भविष्य में मिलने वाला है। इसलिए VB-G RAM G को सिर्फ 125 दिन की घोषणा के आधार पर सफल या असफल मानना जल्दबाजी होगी। पूरे साल के आंकड़े आने के बाद ही इसकी वास्तविक तस्वीर साफ होगी।

नई योजना में पानी और गांव के ढांचे पर जोर

नई व्यवस्था में रोजगार के साथ गांव के विकास को भी जोड़ने की कोशिश की गई है। VB-G RAM G में पानी बचाने और जल सुरक्षा से जुड़े कामों पर जोर रहेगा।

तालाब, जल संरक्षण, पानी रोकने वाले काम और ग्रामीण ढांचे से जुड़े कार्यों के जरिए मजदूरों को रोजगार देने के साथ गांव के लिए स्थायी फायदा पैदा करने का लक्ष्य है।

इसका फायदा दो स्तर पर हो सकता है। पहला, ग्रामीण परिवार को मजदूरी मिलेगी। दूसरा, जिस काम पर मजदूरी खर्च होगी, उससे गांव की कोई स्थायी जरूरत पूरी हो सकती है।

अगर किसी गांव में पानी रोकने का काम होता है तो उससे भविष्य में खेती को फायदा मिल सकता है। अगर ग्रामीण ढांचा मजबूत होता है तो आने वाले वर्षों में उसका इस्तेमाल गांव के लोग कर सकते हैं।

यही वजह है कि VB-G RAM G को सिर्फ मजदूरी बांटने वाली योजना के बजाय ग्रामीण आजीविका और विकास से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

खेती के मौसम में 60 दिन का ब्रेक क्यों?

नई व्यवस्था का एक और बड़ा बदलाव खेती से जुड़ा है। VB-G RAM G में राज्य सरकारें साल में 60 दिन तक योजना के काम को रोकने के लिए अवधि तय कर सकती हैं। यह 60 दिन मुख्य रूप से बुआई और कटाई जैसे खेती के व्यस्त समय को ध्यान में रखकर रखे गए हैं।

सरकार की सोच यह है कि जब खेतों में मजदूरों की जरूरत सबसे ज्यादा होती है, तब ग्रामीण मजदूर सरकारी योजना के काम में व्यस्त रहने के बजाय खेती के काम में भी उपलब्ध रहें।

इससे किसानों को खेतों के लिए मजदूर मिल सकेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में खेती और सरकारी रोजगार के बीच संतुलन बनाने की कोशिश होगी। लेकिन इस व्यवस्था का दूसरा पहलू भी है।

जिस ग्रामीण परिवार के पास अपनी जमीन नहीं है, या जिसके पास खेती से पर्याप्त आमदनी नहीं है, उसके लिए 60 दिन का ब्रेक परेशानी पैदा कर सकता है। ऐसे परिवार सरकारी रोजगार पर ज्यादा निर्भर हो सकते हैं। इसलिए VB-G RAM G में 60 दिन के खेती ब्रेक का वास्तविक असर राज्य और गांव की स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

60 दिन का ब्रेक मजदूरों के लिए राहत या चुनौती?

यह सवाल खासकर उन राज्यों में महत्वपूर्ण होगा जहां ग्रामीण मजदूरों की बड़ी संख्या सरकारी रोजगार पर निर्भर रहती है। अगर खेती के मौसम में गांव में पर्याप्त निजी काम उपलब्ध है, तो 60 दिन का ब्रेक मजदूरों के लिए परेशानी नहीं बनेगा। वे खेतों में मजदूरी करके अपनी आमदनी जारी रख सकते हैं।

लेकिन अगर किसी परिवार के पास खेती से जुड़ा कोई काम नहीं है और स्थानीय स्तर पर दूसरे रोजगार के साधन भी कम हैं, तो सरकारी काम रुकने का असर उनकी आय पर पड़ सकता है।

इसलिए VB-G RAM G की इस व्यवस्था का फायदा तभी ज्यादा होगा जब राज्य सरकारें 60 दिन की अवधि तय करते समय स्थानीय रोजगार और खेती की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखें।

60:40 केंद्र-राज्य फंडिंग की आधिकारिक जानकारी:PIB — VB-G RAM G में फंड शेयरिंग पैटर्न

पैसे का हिसाब भी अब बदल गया

VB-G RAM G में सिर्फ रोजगार के दिनों में बदलाव नहीं हुआ है। पैसे की व्यवस्था भी बदली गई है।

MGNREGA में केंद्र सरकार की वित्तीय जिम्मेदारी ज्यादा थी। अब नई व्यवस्था में सामान्य राज्यों के लिए केंद्र और राज्य के बीच खर्च का अनुपात 60:40 रखा गया है। यानी 60 प्रतिशत खर्च केंद्र और 40 प्रतिशत खर्च राज्य को उठाना होगा।

पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 रखा गया है। इस बदलाव का सीधा मतलब है कि सामान्य राज्यों को ग्रामीण रोजगार पर पहले की तुलना में अपने बजट से ज्यादा रकम लगानी पड़ सकती है। यहीं से VB-G RAM G राज्यों के लिए रोजगार के साथ वित्तीय प्रबंधन की भी परीक्षा बन जाता है।

क्या राज्यों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ?

नई योजना में राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ने से यह सवाल स्वाभाविक है कि जिन राज्यों में ग्रामीण रोजगार की मांग ज्यादा है, वहां सरकारों पर कितना वित्तीय दबाव पड़ेगा।

साल 2026-27 के लिए VB-G RAM G के तहत 95,692 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। केंद्र सरकार हर राज्य के लिए पहले से एक तय बजट यानी नॉर्मेटिव एलोकेशन निर्धारित करेगी। अगर किसी राज्य में रोजगार की मांग बढ़ती है और तय आवंटन से ज्यादा खर्च होता है, तो अतिरिक्त पैसा राज्य को खुद जुटाना पड़ सकता है।

यानी अब राज्य सरकारों को सिर्फ यह नहीं देखना होगा कि कितने लोगों को रोजगार चाहिए। उन्हें यह भी देखना होगा कि रोजगार की बढ़ती मांग के साथ अपने हिस्से की राशि कहां से आएगी। यह बदलाव उन राज्यों के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है जहां ग्रामीण परिवारों की सरकारी रोजगार योजनाओं पर निर्भरता ज्यादा है।

किन राज्यों पर ज्यादा असर पड़ सकता है?

जहां गांवों में रोजगार के दूसरे साधन कम हैं, वहां VB-G RAM G के तहत काम की मांग ज्यादा हो सकती है। ऐसे इलाकों में अगर खेती सीमित है, स्थानीय उद्योग कम हैं या निजी रोजगार के अवसर कम हैं, तो ग्रामीण परिवार सरकारी रोजगार की तरफ ज्यादा रुख कर सकते हैं।

इस स्थिति में 125 दिन की गारंटी ग्रामीण परिवारों के लिए बड़ा सहारा बन सकती है। लेकिन दूसरी तरफ राज्य सरकार पर वित्तीय जिम्मेदारी भी बढ़ सकती है। अगर काम मांगने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ती है और केंद्र से मिले तय बजट से ज्यादा खर्च की जरूरत पड़ती है, तो राज्य को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।

इसलिए VB-G RAM G राज्यों के लिए सिर्फ ग्रामीण रोजगार योजना नहीं, बल्कि बजट प्रबंधन की भी बड़ी चुनौती बनने वाली है।

शुरुआती आंकड़े क्या बता रहे हैं?

नई योजना शुरू हुए अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है, लेकिन शुरुआती आंकड़ों ने सरकार को राहत जरूर दी है।

1 जुलाई से 22 जुलाई 2026 के बीच VB-G RAM G के तहत करीब 99.5 प्रतिशत रोजगार मांगने वालों को काम दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इस अवधि में करीब 5.20 करोड़ मानव-दिवस रोजगार पैदा हुआ।

यह आंकड़ा बताता है कि योजना के शुरुआती दिनों में रोजगार की मांग के मुकाबले काम उपलब्ध कराने की स्थिति काफी मजबूत रही। लेकिन इसे पूरे साल की सफलता का प्रमाण मानना अभी जल्दबाजी होगी।

ग्रामीण रोजगार की मांग पूरे साल एक जैसी नहीं रहती। खेती का मौसम, बारिश, फसल कटाई और स्थानीय रोजगार के अवसरों के हिसाब से मजदूरों की जरूरत बदलती रहती है। इसलिए असली परीक्षा आने वाले महीनों में होगी।

5.20 करोड़ मानव-दिवस रोजगार का मतलब क्या?

मानव-दिवस का मतलब किसी एक व्यक्ति का एक दिन का रोजगार होता है। इस हिसाब से 5.20 करोड़ मानव-दिवस रोजगार का मतलब है कि शुरुआती अवधि में योजना के तहत बड़ी मात्रा में रोजगार पैदा हुआ। लेकिन यहां भी एक सावधानी जरूरी है।

VB-G RAM G की आधिकारिक जानकारी और 125 दिन रोजगार की गारंटी:PIB — VB-G RAM G Act की आधिकारिक जानकारी

5.20 करोड़ मानव-दिवस का आंकड़ा यह नहीं बताता कि कितने परिवारों को पूरे 125 दिन काम मिला। एक परिवार के कई सदस्य काम कर सकते हैं और अलग-अलग दिनों का रोजगार मिलकर मानव-दिवस का आंकड़ा बनाता है।

इसलिए VB-G RAM G के वास्तविक प्रभाव को समझने के लिए सिर्फ मानव-दिवस नहीं, बल्कि परिवारवार रोजगार के आंकड़े भी देखना जरूरी होगा।

कितने परिवारों को 20 दिन काम मिला? कितनों को 50 दिन? कितनों को 100 दिन? और कितने परिवार 125 दिन तक पहुंचे? इन सवालों के जवाब आने वाले समय में ज्यादा महत्वपूर्ण होंगे।

मजदूरी समय पर मिलना भी सबसे बड़ी कसौटी

ग्रामीण मजदूर के लिए काम मिलने के बाद सबसे जरूरी चीज मजदूरी है। अगर मजदूर ने काम किया और भुगतान समय पर नहीं मिला, तो योजना का फायदा अधूरा रह जाता है। इसलिए VB-G RAM G की सफलता का एक बड़ा पैमाना समय पर मजदूरी भुगतान भी होगा।

सरकार की तरफ से डिजिटल भुगतान और पारदर्शी व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है। लेकिन गांव के स्तर पर वास्तविक स्थिति क्या रहती है, यह निगरानी के बाद ही साफ होगा।

मजदूर को काम मिला, उसकी उपस्थिति दर्ज हुई, काम पूरा हुआ और मजदूरी सीधे खाते में समय पर पहुंची—पूरी प्रक्रिया का ठीक से चलना जरूरी होगा। 125 दिन की गारंटी तभी ग्रामीण परिवार के लिए मजबूत सुरक्षा बनेगी, जब उन दिनों की मजदूरी भी बिना अनावश्यक देरी के मिले।

1 जुलाई 2026 से MGNREGA की जगह VB-G RAM G लागू होने की जानकारी:PIB — VB-G RAM G लागू होने की आधिकारिक घोषणा

क्या VB-G RAM G सिर्फ MGNREGA का नया नाम है?

VB-G RAM G को सिर्फ MGNREGA का नाम बदलना कहना पूरी तस्वीर नहीं होगी।

नई योजना में रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 किया गया है। खेती के मौसम को ध्यान में रखते हुए 60 दिन की व्यवस्था लाई गई है। फंडिंग पैटर्न में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी बदली गई है। साथ ही पानी, ग्रामीण ढांचे और स्थायी आजीविका से जुड़े कामों पर ज्यादा जोर दिया गया है।

VB-G RAM G का बड़ा बदलाव! 125 दिन रोजगार

लेकिन दूसरी तरफ ग्रामीण परिवार के लिए सबसे जरूरी सवाल अभी भी वही है, काम कितने दिन मिलेगा? योजना की संरचना बदलने के बाद अब जमीन पर परिणाम देखना जरूरी होगा।

VB-G RAM G : 125 दिन की गारंटी का असली मतलब क्या?

अगर किसी परिवार को पूरे 125 दिन काम मिलता है, तो यह पहले की 100 दिन की व्यवस्था की तुलना में 25 दिन अतिरिक्त रोजगार होगा। यह अतिरिक्त रोजगार परिवार की सालाना आय में महत्वपूर्ण योगदान कर सकता है।

लेकिन अगर काम की मांग तो है और काम उपलब्ध नहीं है, तो कानून में 125 दिन लिखे होने का फायदा सीमित हो जाएगा। इसी वजह से VB-G RAM G की असली सफलता रोजगार के कागजी प्रावधान से नहीं, बल्कि काम मांगने वाले परिवारों तक रोजगार पहुंचने से तय होगी।

शुरुआती आंकड़े—99.5% रोजगार मांगने वालों को काम और 5.20 करोड़ मानव-दिवस:PIB — VB-G RAM G के शुरुआती आंकड़े

छत्तीसगढ़ के गांवों पर क्या असर पड़ सकता है?

छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में VB-G RAM G का असर खास तौर पर महत्वपूर्ण हो सकता है। यहां ग्रामीण परिवारों की आय खेती और मजदूरी दोनों से जुड़ी है।

125 दिन की रोजगार गारंटी गांव के उन परिवारों के लिए अतिरिक्त सहारा बन सकती है, जिन्हें पूरे साल नियमित काम नहीं मिलता। जल संरक्षण और ग्रामीण ढांचे पर काम होने से खेती और गांव की सुविधाओं को भी फायदा हो सकता है। लेकिन 60:40 की फंडिंग व्यवस्था के कारण राज्य सरकार को अपने हिस्से का पैसा भी जुटाना होगा।

इसलिए छत्तीसगढ़ में योजना का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि रोजगार की मांग कितनी रहती है, केंद्र से कितना आवंटन मिलता है और राज्य सरकार अपने हिस्से की राशि को किस तरह व्यवस्थित करती है।

आगे क्या होगा?

अब आने वाले कुछ साल VB-G RAM G के लिए सबसे अहम होंगे। सरकार को यह साबित करना होगा कि 125 दिन की रोजगार गारंटी सिर्फ कानून में दर्ज संख्या नहीं है, बल्कि गांव के परिवार को वास्तविक रोजगार देने की क्षमता भी रखती है।

राज्यों को अपने हिस्से की राशि की व्यवस्था करनी होगी। पंचायतों को जरूरत के हिसाब से काम तैयार करना होगा। रोजगार मांगने वाले परिवारों को समय पर काम देना होगा और मजदूरी भुगतान में देरी रोकनी होगी।

इसके साथ यह भी देखना होगा कि योजना के तहत होने वाले काम वास्तव में गांव के लिए कितने उपयोगी हैं।

अब निगरानी सिर्फ काम पूरा होने तक सीमित नहीं रहेगी। तालाब बनने के बाद उसमें पानी कितना ठहरता है, जल संरक्षण से खेती को कितना फायदा पहुंचता है और तैयार किए गए ग्रामीण ढांचे का लंबे समय तक कितना इस्तेमाल होता है—इन सबका हिसाब भी जरूरी होगा। आखिर योजना पर खर्च हुआ पैसा गांव की तस्वीर बदल रहा है या सिर्फ कागजों में काम पूरा दिखाया जा रहा है? यही सवाल योजना की असली सफलता बताएंगे।

असली सवाल 125 दिन नहीं, काम के वास्तविक दिन हैं

VB-G RAM G ने ग्रामीण परिवार के सामने रोजगार की सीमा बढ़ाकर 125 दिन कर दी है। लेकिन आने वाले समय में इसकी सफलता का पैमाना यही होगा कि वास्तव में कितने परिवार इस सीमा के करीब पहुंचते हैं। पुराने आंकड़ों में औसतन करीब 48 दिन रोजगार मिलने की स्थिति को देखते हुए 125 दिन तक पहुंचना बड़ी चुनौती है।

अगर सरकार रोजगार की मांग के अनुसार पर्याप्त काम उपलब्ध कराती है और मजदूरी समय पर मिलती है, तो नई व्यवस्था ग्रामीण परिवारों की आय को मजबूत कर सकती है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो 125 दिन की गारंटी कागज पर बड़ी दिखाई देगी, लेकिन उसका असर जमीन पर उतना बड़ा नहीं होगा।

बदलाव बड़ा है, अब परिणाम की बारी

VB-G RAM G ने ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में कई बड़े बदलाव किए हैं। 100 दिन की जगह 125 दिन रोजगार की गारंटी, खेती के मौसम में 60 दिन की व्यवस्था, केंद्र-राज्य के बीच 60:40 फंडिंग और पानी तथा ग्रामीण ढांचे पर ज्यादा जोर इस नई व्यवस्था की प्रमुख बातें हैं।

शुरुआती आंकड़ों में 1 जुलाई से 22 जुलाई 2026 के बीच 99.5 प्रतिशत रोजगार मांगने वालों को काम मिलने और करीब 5.20 करोड़ मानव-दिवस रोजगार बनने की तस्वीर सामने आई है। लेकिन यह अभी शुरुआती चरण है। आने वाले महीनों में असली सवाल होगा कि कितने परिवारों को कितने दिन काम मिला और उन्हें मजदूरी कितनी जल्दी मिली।

राज्यों के लिए भी चुनौती कम नहीं है। 60:40 के वित्तीय मॉडल में उन्हें अपनी हिस्सेदारी के लिए बजट तैयार रखना होगा। जिन राज्यों में रोजगार की मांग ज्यादा है, वहां अतिरिक्त खर्च का दबाव भी बढ़ सकता है। इसलिए VB-G RAM G को लेकर फिलहाल सबसे सही निष्कर्ष यही है कि बदलाव कागज पर बड़ा है, लेकिन इसकी असली परीक्षा जमीन पर होगी।

अगर 125 दिन की गारंटी वास्तव में ग्रामीण परिवार तक पहुंचती है, मजदूरी समय पर मिलती है, खेती के मौसम की व्यवस्था संतुलित रहती है और गांवों में बने काम लंबे समय तक फायदा देते हैं, तो यह ग्रामीण रोजगार की तस्वीर बदल सकता है।

लेकिन अगर रोजगार की मांग और उपलब्ध काम के बीच अंतर बना रहा, भुगतान में देरी हुई या राज्यों पर बढ़ा वित्तीय बोझ काम की रफ्तार को प्रभावित करता है, तो योजना के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

यानी आने वाले कुछ साल तय करेंगे कि VB-G RAM G सिर्फ MGNREGA की जगह आया नया कानून है या गांवों में रोजगार, मजदूरी और आजीविका को मजबूत करने वाला वास्तव में बड़ा बदलाव।

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