पीएम सूर्य घर योजना धोखाधड़ी: सोलर के नाम पर 4.50 लाख की ठगी! 10KW का झांसा ?

पीएम सूर्य घर योजना धोखाधड़ी

बिलासपुर। पीएम सूर्य घर योजना धोखाधड़ी का एक मामला बिलासपुर से सामने आया है। आरोप है कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 10 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगाने का झांसा देकर एक सेवानिवृत्त अधिकारी से 4.50 लाख रुपये ले लिए गए। रकम लेने के बाद आरोपियों ने सोलर पैनल लगाने का काम पूरा नहीं किया और कई महीने बीतने के बावजूद न तो सोलर सिस्टम लगाया गया और न ही पूरी राशि वापस की गई।

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मामला सामने आने के बाद पीड़ित की शिकायत पर सरकंडा पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें जितेंद्र कुमार मौर्य, कुलविंदर सिंह धालीवाल और टेकर हैंड्री मोंडिस शामिल हैं।

पीएम सूर्य घर योजना धोखाधड़ी

पीएम सूर्य घर योजना धोखाधड़ी का मामला कैसे सामने आया?

जानकारी के अनुसार बिलासपुर के जगनाथपुरम कॉलोनी, राजकिशोर नगर निवासी 70 वर्षीय विश्वनाथ पाण्डेय एसईसीएल से सेवानिवृत्त अर्ध-शासकीय अधिकारी हैं। उन्होंने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि नवंबर 2025 में जितेंद्र कुमार मौर्य, कुलविंदर सिंह धालीवाल और टेकर हैंड्री मोंडिस उनके घर पहुंचे थे।

आरोप है कि तीनों ने पाण्डेय को पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 10 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगाने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने बताया कि सोलर सिस्टम लगने के बाद बिजली के खर्च में कमी आएगी और योजना के तहत मिलने वाले लाभ का भी फायदा लिया जा सकेगा।

आरोपियों ने करीब दो महीने में सोलर सिस्टम लगाने का भरोसा दिलाया। उनके प्रस्ताव पर भरोसा करते हुए विश्वनाथ पाण्डेय ने रकम का भुगतान करना शुरू कर दिया।

शिकायत के मुताबिक अलग-अलग तारीखों में कुल 4.50 लाख रुपये आरोपियों को दिए गए। रकम पूरी मिलने के बाद भी सोलर सिस्टम लगाने का काम शुरू नहीं किया गया।

यहीं से पीएम सूर्य घर योजना धोखाधड़ी का मामला गंभीर होता गया।

पीएम सूर्य घर योजना धोखाधड़ी में 4.50 लाख रुपये का भुगतान कैसे हुआ?

पीड़ित के मुताबिक आरोपियों के प्रस्ताव पर सहमति जताने के बाद उन्होंने कुल 4.50 लाख रुपये का भुगतान किया था। शिकायत में बताया गया है कि पहली बड़ी रकम 1 दिसंबर 2025 को 2 लाख रुपये RTGS के माध्यम से भेजी गई।

इसके बाद 5 दिसंबर 2025 को 1.50 लाख रुपये चेक के जरिए दिए गए। वहीं 9 जनवरी 2026 को 1 लाख रुपये RTGS के माध्यम से कुलविंदर सिंह धालीवाल के खाते में ट्रांसफर किए गए।

इस तरह अलग-अलग भुगतान के जरिए कुल रकम 4.50 लाख रुपये तक पहुंच गई।

पीड़ित का कहना है कि पूरी रकम लेने के बाद भी आरोपियों ने अपना वादा पूरा नहीं किया। सोलर सिस्टम लगाने के लिए न तो काम शुरू किया गया और न ही भुगतान की गई राशि वापस की गई।

पीएम सूर्य घर योजना धोखाधड़ी

पीएम सूर्य घर योजना के नाम पर क्या हुआ?

शिकायत के मुताबिक आरोपियों ने शुरुआत में सोलर सिस्टम लगाने के लिए जल्द काम पूरा करने का भरोसा दिया था। करीब दो महीने के अंदर 10 किलोवाट का सिस्टम लगाने की बात कही गई थी।

विश्वनाथ पाण्डेय ने इसी भरोसे पर आरोपियों को रकम दी। लेकिन समय बीतने के बाद भी जब घर पर सोलर पैनल नहीं लगाया गया तो उन्होंने आरोपियों से संपर्क करना शुरू किया।

पीड़ित का आरोप है कि शुरुआत में आरोपी फोन पर जल्द काम शुरू करने की बात कहते रहे। इसके बाद धीरे-धीरे संपर्क कम होता गया।

कई बार फोन करने के बाद भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला। शिकायत के अनुसार कुछ मौकों पर फोन नहीं उठाया गया और जब फोन उठाया गया तो काम जल्द कराने का आश्वासन दिया गया।

लेकिन जनवरी 2026 के बाद भी सोलर सिस्टम नहीं लगाया गया।

कई महीने बीते, न सोलर पैनल लगा न पैसा वापस मिला

पीएम सूर्य घर योजना धोखाधड़ी के इस मामले में पीड़ित की परेशानी यहीं खत्म नहीं हुई। रकम देने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि कुछ ही समय में घर पर 10 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगा दिया जाएगा।

लेकिन कई महीने गुजरने के बावजूद न तो सोलर पैनल लगाया गया और न ही उनकी रकम वापस की गई।

पीड़ित के मुताबिक जब उन्होंने आरोपियों से पैसे वापस करने की मांग की तो भी उन्हें लगातार आश्वासन मिलता रहा। कभी काम शुरू करने की बात कही गई तो कभी जल्द रकम लौटाने का भरोसा दिया गया।

समय बीतने के साथ पीड़ित को लगा कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। इसके बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की।

पीएम सूर्य घर योजना धोखाधड़ी

पीएम सूर्य घर योजना धोखाधड़ी : सेवानिवृत्त अधिकारी ने पुलिस से की शिकायत

70 वर्षीय विश्वनाथ पाण्डेय ने पीएम सूर्य घर योजना धोखाधड़ी मामले की जानकारी पुलिस को दी। शिकायत में उन्होंने बताया कि आरोपियों ने सोलर सिस्टम लगाने का प्रस्ताव दिया था और इसी आधार पर उनसे 4.50 लाख रुपये लिए गए।

शिकायत में भुगतान की तारीख और भुगतान के माध्यम का भी उल्लेख किया गया है। इससे पुलिस को बैंक लेनदेन की जांच करने में मदद मिल सकती है।

पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए तीनों आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया है।

अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आरोपियों ने वास्तव में सोलर सिस्टम लगाने के लिए कोई प्रक्रिया शुरू की थी या नहीं और रकम लेने के बाद उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया।

पीएम सूर्य घर योजना धोखाधड़ी में तीन लोगों पर केस

सरकंडा पुलिस ने शिकायत के आधार पर जितेंद्र मौर्य, कुलविंदर सिंह धालीवाल और टेकर हैंड्री मोंडिस के खिलाफ अपराध दर्ज किया है।

पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 3(5) के तहत पीएम सूर्य घर योजना धोखाधड़ी मामलें में कार्रवाई शुरू की है।

धारा 318(4) धोखाधड़ी से संबंधित गंभीर अपराध के मामलों में लगाई जाती है, जबकि धारा 3(5) एक से ज्यादा लोगों द्वारा मिलकर किए गए अपराध से जुड़ी है।

हालांकि पुलिस की जांच अभी जारी है। इसलिए आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

पीएम सूर्य घर योजना धोखाधड़ी में बैंक ट्रांजेक्शन भी जांच का हिस्सा

इस मामले में पुलिस के सामने सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक 4.50 लाख रुपये का लेनदेन है।

शिकायत के अनुसार 2 लाख रुपये RTGS से, 1.50 लाख रुपये चेक के जरिए और 1 लाख रुपये RTGS से ट्रांसफर किए गए थे।

पुलिस इन लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड की जांच कर सकती है। इसके अलावा जिस खाते में रकम ट्रांसफर हुई, उस खाते की जानकारी भी जांच का हिस्सा बन सकती है।

अगर जांच में शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो पुलिस आगे आरोपियों से पूछताछ और अन्य कानूनी कार्रवाई कर सकती है।

10 किलोवाट सोलर सिस्टम लगाने का था दावा

शिकायत में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पीएम सूर्य घर योजना धोखाधड़ी मामलें में आरोपियों ने 10 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगाने का प्रस्ताव दिया था।

पीड़ित के मुताबिक उन्हें बताया गया था कि सिस्टम लगाने का काम लगभग दो महीने में पूरा कर दिया जाएगा। इसी भरोसे पर उन्होंने भुगतान किया।

लेकिन निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी घर पर सोलर सिस्टम नहीं लगाया गया।

सोलर सिस्टम लगाने के नाम पर बड़ी रकम लेने और फिर काम पूरा नहीं करने के आरोप ने पूरे मामले को पीएम सूर्य घर योजना धोखाधड़ी के रूप में पुलिस जांच के दायरे में ला दिया है।

पीएम सूर्य घर योजना क्या है?

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना केंद्र सरकार की एक योजना है, जिसका उद्देश्य घरों की छतों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम को बढ़ावा देना है।

इस योजना के तहत पात्र परिवार अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगाकर बिजली उत्पादन कर सकते हैं। इससे बिजली के खर्च को कम करने में मदद मिल सकती है।

योजना को लेकर लोगों में लगातार जागरूकता बढ़ रही है। ऐसे में सोलर सिस्टम लगाने के नाम पर लोगों से संपर्क करने वाले निजी व्यक्ति या एजेंसियां भी सामने आती हैं।

यही कारण है कि सोलर सिस्टम लगवाने से पहले उपभोक्ताओं को संबंधित विक्रेता, इंस्टॉलर और योजना की आधिकारिक प्रक्रिया की जानकारी लेना जरूरी है।

योजना के नाम पर निजी लोगों से सावधान रहने की जरूरत

बिलासपुर का यह पीएम सूर्य घर योजना धोखाधड़ी मामला सामने आने के बाद सोलर सिस्टम लगवाने वाले लोगों के लिए भी सावधानी जरूरी हो गई है।

किसी भी व्यक्ति या एजेंसी के कहने मात्र पर बड़ी रकम का भुगतान करने से पहले उसकी पहचान और अधिकृत स्थिति की जांच करनी चाहिए। इसके अलावा भुगतान की रसीद, अनुबंध, बैंक ट्रांजेक्शन और सिस्टम लगाने से संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखना जरूरी है।

अगर कोई व्यक्ति योजना के नाम पर जल्द भुगतान करने का दबाव बनाता है तो पहले उसकी जानकारी की पुष्टि करना बेहतर है।

खासकर बुजुर्ग और सेवानिवृत्त लोगों को किसी भी सरकारी योजना के नाम पर आने वाले प्रस्ताव की स्वतंत्र रूप से जांच करनी चाहिए।

पीएम सूर्य घर योजना धोखाधड़ी में शिकायतकर्ता का आरोप क्या है?

विश्वनाथ पाण्डेय का मुख्य आरोप है कि उन्होंने आरोपियों के प्रस्ताव पर भरोसा करके 4.50 लाख रुपये का भुगतान किया था। आरोपियों ने 10 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगाने का भरोसा दिया था।

लेकिन भुगतान के बाद काम नहीं किया गया।

शिकायतकर्ता के अनुसार जब उन्होंने लगातार संपर्क किया तो कभी काम जल्द शुरू करने का भरोसा दिया गया और कभी फोन तक नहीं उठाया गया।

जनवरी 2026 से कई महीने बीतने के बावजूद न तो सोलर पैनल लगाया गया और न ही भुगतान की गई पूरी राशि वापस की गई।

इसी वजह से उन्होंने पुलिस की मदद ली।

पुलिस अब किन बिंदुओं पर करेगी जांच?

पीएम सूर्य घर योजना धोखाधड़ी मामले में पुलिस के सामने कई सवाल हैं।

सबसे पहले यह जांच जरूरी होगी कि आरोपियों ने वास्तव में सोलर सिस्टम लगाने के लिए कोई बुकिंग, ऑर्डर या इंस्टॉलेशन प्रक्रिया शुरू की थी या नहीं।

इसके साथ ही 4.50 लाख रुपये के भुगतान की पुष्टि की जाएगी। बैंक रिकॉर्ड और चेक से संबंधित जानकारी भी जांच में महत्वपूर्ण हो सकती है।

पुलिस आरोपियों और शिकायतकर्ता के बीच हुई बातचीत, फोन कॉल और अन्य उपलब्ध जानकारी की भी जांच कर सकती है।

इसके अलावा यह भी पता लगाया जा सकता है कि आरोपियों ने इसी तरह किसी अन्य व्यक्ति से रकम ली है या नहीं।

अगर जांच में ऐसे और मामले सामने आते हैं तो पुलिस कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है।

पीएम सूर्य घर योजना धोखाधड़ी : क्या यह केवल एक व्यक्ति से जुड़ा मामला है?

फिलहाल सामने आई शिकायत के आधार पर मामला विश्वनाथ पाण्डेय से जुड़ा है। लेकिन पुलिस जांच के दौरान यह भी पता लगाया जा सकता है कि आरोपियों ने किसी और व्यक्ति को भी इसी तरह सोलर सिस्टम लगाने का प्रस्ताव दिया था या नहीं।

सरकारी योजनाओं के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी में कई बार लोगों को कम कीमत, सब्सिडी या जल्द काम पूरा करने का लालच दिया जाता है।

इसलिए जांच एजेंसी के लिए यह देखना भी जरूरी होगा कि आरोपियों की गतिविधियां केवल एक शिकायत तक सीमित थीं या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क था।

हालांकि इस संबंध में अभी कोई अतिरिक्त तथ्य सामने नहीं आया है। इसलिए आगे की जानकारी पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

सोलर सिस्टम लगवाने से पहले क्या सावधानी रखें?

बिलासपुर के इस मामले से लोगों को भी सीख लेने की जरूरत है। अगर कोई व्यक्ति पीएम सूर्य घर योजना के तहत सोलर सिस्टम लगाने का प्रस्ताव देता है तो बिना जांच किए बड़ी रकम नहीं देनी चाहिए।

सबसे पहले योजना की आधिकारिक जानकारी देखनी चाहिए। इसके बाद संबंधित विक्रेता या इंस्टॉलर की जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।

भुगतान करते समय बैंक रिकॉर्ड, रसीद और लिखित समझौता जरूर रखना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति केवल मौखिक भरोसे पर लाखों रुपये मांगता है तो अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।

इसके अलावा काम पूरा होने की समयसीमा और भुगतान की शर्तें लिखित रूप में लेना भी उपयोगी हो सकता है।

पीएम सूर्य घर योजना धोखाधड़ी में आगे क्या होगा?

सरकंडा पुलिस ने फिलहाल तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आगे जांच के आधार पर आरोपियों से पूछताछ, दस्तावेजों की जांच और बैंक लेनदेन की पड़ताल की जा सकती है।

पुलिस यह भी देखेगी कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि करने वाले कौन-कौन से सबूत उपलब्ध हैं।

अगर जांच में धोखाधड़ी के आरोप सही पाए जाते हैं तो आरोपियों के खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल मामले में आरोप साबित होना बाकी है और अंतिम निर्णय न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही होगा।

बिलासपुर में सोलर योजना के नाम पर 4.50 लाख की शिकायत

बिलासपुर यह पीएम सूर्य घर योजना धोखाधड़ी मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें सरकारी योजना का नाम लेकर सोलर सिस्टम लगाने का प्रस्ताव देने और फिर बड़ी रकम लेने का आरोप है।

70 वर्षीय सेवानिवृत्त अधिकारी से कुल 4.50 लाख रुपये लिए जाने की शिकायत है। भुगतान दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में अलग-अलग माध्यमों से किया गया।

इसके बावजूद कई महीने तक 10 किलोवाट का सोलर सिस्टम नहीं लगाया गया। शिकायतकर्ता के मुताबिक बार-बार संपर्क करने के बाद भी उन्हें केवल आश्वासन मिलता रहा।

अब सरकंडा पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

पीएम सूर्य घर योजना धोखाधड़ी का यह मामला लोगों के लिए एक जरूरी चेतावनी भी है। सरकारी योजना का नाम सुनकर किसी व्यक्ति या एजेंसी पर तुरंत भरोसा करने के बजाय उसकी पूरी जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है।

बिलासपुर के विश्वनाथ पाण्डेय की शिकायत के मुताबिक उन्हें 10 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगाने का प्रस्ताव दिया गया था और इसके लिए उनसे कुल 4.50 लाख रुपये लिए गए। आरोप है कि रकम लेने के बाद सोलर सिस्टम नहीं लगाया गया और पैसा भी वापस नहीं किया गया।

सरकंडा पुलिस ने शिकायत के आधार पर तीन लोगों के खिलाफ BNS की धारा 318(4) और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

अब जांच से यह साफ होगा कि इस मामले में वास्तव में क्या हुआ, रकम किस उद्देश्य से ली गई थी और सोलर सिस्टम लगाने का कोई वास्तविक प्रयास किया गया था या नहीं।

पीएम सूर्य घर योजना की आधिकारिक जानकारी

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