महतारी वंदन योजना में बड़ा खुलासा, सरकारी नौकरी वालों के घर वालों ने भी उठा लिया फायदा, अब होगी वसूली

महतारी वंदन योजना में बड़ा खुलासा

बिलासपुर के बिल्हा में महतारी वंदन योजना में बड़ा खुलासा, सरकारी नौकरी वालों के घर की 11 महिलाओं ने उठाया गलत फायदा, अब 1.24 लाख रुपये की वसूली शुरू, वेतन से कटौती की भी चेतावनी।

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी वंदन योजना एक बार फिर चर्चा में है। लेकिन इस बार वजह कोई अच्छी खबर नहीं, बल्कि एक गड़बड़ी है। बिलासपुर जिले के बिल्हा इलाके से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने महतारी वंदन योजना की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में पता चला कि जिन औरतों के घर में कोई सरकारी नौकरी में है, और जिन्हें नियम के हिसाब से महतारी वंदन योजना का पैसा मिलना ही नहीं चाहिए था, उनके खाते में भी हर महीने पैसा आता रहा। यह बात सामने आते ही अफसरों में हलचल मच गई और अब पैसा वापस लेने का काम शुरू कर दिया गया है।

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महतारी वंदन योजना

आखिर महतारी वंदन योजना है क्या

छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश की शादीशुदा औरतों की मदद के लिए महतारी वंदन योजना शुरू की थी। इसके तहत जो औरतें पात्र हैं, उनके बैंक खाते में हर महीने एक हजार रुपये सीधे भेजे जाते हैं। योजना का मकसद यही था कि गरीब और जरूरतमंद घरों की औरतों को थोड़ी राहत मिले, ताकि वो अपने छोटे-मोटे खर्च के लिए किसी के सामने हाथ न फैलाएं। लेकिन महतारी वंदन योजना के नियम में साफ लिखा है कि जिन घरों में पति या पत्नी सरकारी नौकरी में हैं, वो इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं। फिर भी बिल्हा में हुई जांच बताती है कि इस नियम को नजरअंदाज कर कई औरतों ने यह पैसा ले लिया।

महतारी वंदन योजना की आधिकारिक वेबसाइट

बिल्हा में जांच से मचा हड़कंप

महतारी वंदन योजना के हितग्राहियों की जांच के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग समय-समय पर पड़ताल करता रहता है। इसी पड़ताल में बिल्हा में चौंकाने वाली बात सामने आई। सूत्रों के मुताबिक, एकीकृत बाल विकास परियोजना, बिल्हा की टीम ने जब कागजातों की बारीकी से जांच की, तो शिक्षा विभाग से जुड़े घरों की कुल 11 औरतें ऐसी मिलीं, जो महतारी वंदन योजना का फायदा लेने के लायक नहीं थीं।

पता चला कि इनमें से कुछ औरतें खुद सरकारी टीचर हैं, और कुछ के पति वर्ग-1, वर्ग-2 अफसर, टीचर या सहायक शिक्षक की नौकरी में हैं। नियम के हिसाब से ऐसे घरों को महतारी वंदन योजना की लिस्ट से बाहर रखा जाना चाहिए था, लेकिन निगरानी में हुई चूक की वजह से यह गड़बड़ी लंबे समय तक चलती रही।

किन-किन नामों का पता चला

बिल्हा की जांच में जिन 11 अपात्र औरतों के नाम सामने आए हैं, उनमें रत्ना क्षत्री, गंगा बाई, रमा वर्मा, दिनेश्वरी कुर्रे, कुसुम यादव, गोदावरी कौशिक, रामेश्वरी साहू, कीर्ति पाटले, सविता कुर्रे, अमर ज्योति शांडिल्य और लक्ष्मी शामिल हैं। इन सबके बैंक खाते में महतारी वंदन योजना का पैसा हर महीने आता रहा, जबकि नियम के हिसाब से इन्हें यह पैसा मिलना ही नहीं चाहिए था। जानकारों का कहना है कि ऐसी गड़बड़ी अक्सर तब होती है जब फॉर्म भरते वक्त सही जानकारी नहीं दी जाती, या फिर जांच के समय लापरवाही हो जाती है। महतारी वंदन योजना के इस मामले ने यह भी दिखा दिया कि कागजातों की सही जांच में अभी भी काफी सुधार की जरूरत है।

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कुल 1.24 लाख रुपये वापस लेने का आदेश

जांच पूरी होने के बाद अब प्रशासन ने इन अपात्र औरतों से गलत तरीके से मिला पैसा वापस लेने का काम शुरू कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, इन 11 मामलों में कुल मिलाकर 1.24 लाख रुपये वापस लिए जाने हैं। इसकी जानकारी अफसरों को भेज दी गई है, और इस काम को पूरा करने के लिए बिल्हा बीईओ दफ्तर को चिट्ठी भेजी गई है। महतारी वंदन योजना के तहत मिला यह पैसा वापस कराने के लिए इन सब औरतों को अलग-अलग बताया जा रहा है, ताकि वो तय समय के अंदर पैसा जमा करा सकें।

तनख्वाह से कटौती की चेतावनी

इस मामले में प्रशासन का रुख काफी सख्त दिख रहा है। बिल्हा बीईओ भूपेंद्र कौशिक के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, अगर तय समय में संबंधित औरतें या उनके घर वाले पैसा जमा नहीं कराते हैं, तो उनकी तनख्वाह से सीधे काटकर महतारी वंदन योजना का पैसा वापस लिया जाएगा। चूंकि इनमें से ज्यादातर मामलों में हितग्राही या उनके परिवार सरकारी नौकरी में हैं, इसलिए तनख्वाह से कटौती का रास्ता प्रशासन के लिए आसान माना जा रहा है। हालांकि विभाग के सूत्रों का कहना है कि पहले सबको खुद से पैसा जमा कराने का मौका दिया जाएगा, और तनख्वाह से कटौती तभी होगी जब तय समय में पैसा जमा नहीं होगा।

महिला एवं बाल विकास विभाग की भूमिका

महतारी वंदन योजना को चलाने और उस पर नजर रखने का काम मुख्य रूप से महिला एवं बाल विकास विभाग का है। इसी विभाग की सक्रियता से बिल्हा में यह गड़बड़ी पकड़ में आई। विभाग के अफसरों का कहना है कि पूरे प्रदेश में इसी तरह की जांच लगातार चल रही है, ताकि योजना का फायदा सिर्फ असली पात्र औरतों तक ही पहुंचे। महिला एवं बाल विकास विभाग, छत्तीसगढ़

सूत्रों के मुताबिक, बिल्हा के अलावा जिले के बाकी इलाकों में भी ऐसी ही जांच चल रही है, और आने वाले समय में और भी अपात्र मामले सामने आने की आशंका है। यह साफ है कि महतारी वंदन योजना को लेकर अब सरकार सख्त होने के मूड में है और किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जनता के मन में उठ रहे सवाल

इस पूरे मामले ने आम लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब महतारी वंदन योजना के नियम में शुरू से ही साफ लिखा था कि सरकारी नौकरी वाले घर इसके लायक नहीं हैं, तो फिर इतने महीनों तक इन खातों में पैसा कैसे आता रहा? क्या फॉर्म भरते वक्त कागजातों की सही जांच नहीं हुई, या फिर जांच में ही चूक हो गई?

लोगों का कहना है कि अगर शुरुआत में ही ठीक से जांच होती, तो सरकार का यह पैसा बचाया जा सकता था। गांव में रहने वाली उन जरूरतमंद औरतों के लिए यह बात और भी चिंता वाली है, जो सच में इस पैसे की हकदार हैं, लेकिन सही जानकारी न मिलने की वजह से उन्हें दिक्कत आती है। इसलिए लोगों की मांग है कि महतारी वंदन योजना जैसी अच्छी योजना में जांच का काम और भी सख्त होना चाहिए।

प्रशासन की जिम्मेदारी पर उठे सवाल

यह मामला सिर्फ 11 औरतों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम के काम करने के तरीके पर सवाल खड़ा करता है। सूत्रों की मानें तो गांव-कस्बे में हितग्राही चुनने और जांच करने का काम आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सुपरवाइजर और परियोजना अफसरों के हाथ में होता है। महतारी वंदन योजना जैसी बड़ी योजना में जब लाखों औरतों का डाटा एक साथ संभालना होता है, तो गलती होने की गुंजाइश से इनकार नहीं किया जा सकता।

लेकिन आम जनता के हित की बात करें तो यह जरूरी है कि प्रशासन ऐसी गलती दोबारा न हो, इसके लिए ठोस कदम उठाए। सिर्फ पैसा वापस ले लेना काफी नहीं है, बल्कि यह भी देखना होगा कि आगे से ऐसी गड़बड़ी न हो। कई जागरूक लोगों का मानना है कि महतारी वंदन योजना के हर हितग्राही के नौकरी रिकॉर्ड को शुरू में ही शिक्षा विभाग और बाकी सरकारी विभागों के रिकॉर्ड से मिलाकर देखा जाना चाहिए, ताकि ऐसी दिक्कत दोबारा न आए।

दूसरे जिलों में भी मिल चुके हैं ऐसे मामले

बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब महतारी वंदन योजना में अपात्र लोगों को फायदा मिलने की बात सामने आई हो। इससे पहले भी प्रदेश के कई जिलों से समय-समय पर ऐसी खबरें आती रही हैं, जिनमें सरकारी नौकरी वाले घरों या दूसरी अपात्र औरतों को गलती से योजना का पैसा मिलता रहा। सूत्रों के मुताबिक, राज्य स्तर पर भी ऐसे मामलों को लेकर बैठकें हो रही हैं, ताकि महतारी वंदन योजना के काम में साफ-सफाई लाई जा सके। अफसर इस बात पर जोर दे रहे हैं कि हर जिले में समय-समय पर जांच अभियान चले, ताकि अपात्र लोगों की पहचान समय रहते हो जाए और सरकार का पैसा बेकार न जाए।

अब आगे पैसा कैसे वापस लिया जाएगा

अब सवाल यह है कि आगे की कार्रवाई कैसे होगी। विभाग के सूत्रों के मुताबिक, सबसे पहले सभी 11 अपात्र औरतों को नोटिस भेजकर एक तय समय के अंदर पैसा जमा कराने के लिए कहा जाएगा। महतारी वंदन योजना का यह पैसा उन्हें सरकारी खाते में जमा कराना होगा।

अगर तय समय में पैसा जमा नहीं होता, तो जिन औरतों के घर वाले सरकारी नौकरी में हैं, उनकी तनख्वाह से सीधे काटकर वसूली शुरू कर दी जाएगी। इस पूरे काम पर बिल्हा बीईओ दफ्तर के साथ-साथ महिला एवं बाल विकास विभाग भी नजर रखेगा, ताकि पैसा वापस लेने में देरी न हो। महतारी वंदन योजना से जुड़े इस मामले में प्रशासन का कहना है कि जल्द से जल्द पैसा वापस लिया जाएगा।

नियम की जानकारी लोगों तक पहुंचना जरूरी

इस पूरे मामले से एक बड़ी सीख यह भी मिलती है कि महतारी वंदन योजना के नियम की जानकारी आम लोगों और आवेदन करने वालों तक अच्छे से पहुंचनी चाहिए। कई बार औरतें या उनके घर वाले बिना जाने-समझे ही ऐसी योजनाओं के लिए फॉर्म भर देते हैं, जिनके लिए वो नियम के हिसाब से पात्र नहीं होतीं। इसलिए जरूरी है कि फॉर्म भरते वक्त ही साफ-साफ बता दिया जाए कि किन हालात में औरतें इस योजना का फायदा नहीं ले सकतीं।

महतारी वंदन योजना के नियम में साफ है कि अगर घर में कोई सरकारी, अर्धसरकारी या नगर निकाय में पक्की नौकरी में है और एक तय सीमा से ज्यादा कमाता है, तो वह घर इस योजना के दायरे से बाहर हो जाता है। फिर भी जानकारी न होने की वजह से या जानबूझकर गलत जानकारी देकर कुछ लोग इसका फायदा उठा लेते हैं, जिसका नुकसान आखिर में सरकार के खजाने और असली जरूरतमंद औरतों को उठाना पड़ता है।

आगे भी जांच का काम चलता रहेगा

बिल्हा में सामने आए इस मामले के बाद यह साफ हो गया है कि महतारी वंदन योजना को लेकर जांच का काम अब और तेज किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि जिले के बाकी इलाकों में भी इसी तरह जांच अभियान चलाया जाएगा, ताकि अगर कहीं और भी ऐसे अपात्र लोग हों, तो उनकी भी समय रहते पहचान हो सके।

प्रशासन का मानना है कि इस तरह की सावधानी से न सिर्फ सरकार का पैसा बचेगा, बल्कि महतारी वंदन योजना जैसी योजनाओं पर लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा। विभाग के अफसरों के मुताबिक, आने वाले दिनों में जांच के काम को और डिजिटल और साफ बनाने पर भी सोचा जा रहा है, ताकि गलती होने की गुंजाइश कम से कम रहे।

कुल मिलाकर बिलासपुर जिले के बिल्हा इलाके से सामने आया यह मामला महतारी वंदन योजना को चलाने में हुई कमियों की तरफ इशारा करता है। यह सही है कि गड़बड़ी पकड़ में आते ही प्रशासन ने तुरंत पैसा वापस लेने का काम शुरू कर दिया, और जरूरत पड़ने पर तनख्वाह से कटौती की चेतावनी भी दी है, लेकिन असली सवाल यह है कि आखिर इतने महीनों तक यह गड़बड़ी पकड़ में क्यों नहीं आई।

लोगों की मांग है कि महतारी वंदन योजना जैसी अच्छी योजनाओं में शुरुआत से ही जांच का काम इतना सख्त हो कि किसी भी अपात्र इंसान को गलती से भी फायदा न मिले, ताकि योजना का असली फायदा उन्हीं जरूरतमंद औरतों तक पहुंचे, जिनके लिए यह योजना बनाई गई है। आने वाले दिनों में देखना यह होगा कि प्रशासन इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाता है और महतारी वंदन योजना को लेकर जिले भर में चल रही जांच का नतीजा क्या निकलता है।

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