NEW DELHI. जंतर-मंतर पर चिलचिलाती धूप में सैकड़ों छात्र बैठे हैं। कुछ के हाथ में प्लेकार्ड हैं – नीट लीक, शिक्षा माफिया मुर्दाबाद, “हमारा भविष्य लौटाओ”, “मंत्री इस्तीफा दो”। पानी की बोतलें सूख चुकी हैं, लेकिन आँखों में आग अभी बाकी है। बिहार, झारखंड, यूपी, राजस्थान से आए ये लड़के-लड़कियाँ महीनों की मेहनत को एक पेपर लीक में जलता देख रहे हैं। ये कोई साधारण खबर नहीं है। ये लाखों परिवारों का सपना टूटने की कहानी है।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने आज एक बड़ी अपील की है। उन्होंने कहा, “सरकार के दरवाजे खुले हैं। छात्र जहां चाहें, जब चाहें बात करने को तैयार हैं। जेपी नड्डा के घर पर हो या ऑफिस में, हम तैयार हैं।” उन्होंने बताया कि पीएम मोदी खुद इस मामले में संवेदनशील हैं और दोषियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट से सजा दिलाने का फैसला लिया गया है। लेकिन जंतर-मंतर पर सीजेपी के छात्र अभी भी अड़े हुए हैं। उनका कहना साफ है – पहले शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें, फिर बातचीत।
छात्रों की मेहनत, सपनों का कत्ल
कल्पना करो। एक गरीब परिवार का लड़का। नाम रख लो राहुल। बिहार के छोटे से गाँव से। पिता खेत मजदूरी करते हैं, माँ घर संभालती है। राहुल रात-रात भर जागकर NEET की तैयारी करता है। कोचिंग के पैसे जुटाने के लिए परिवार ने कर्ज लिया। गाँव में सब कहते थे – ये डॉक्टर बनेगा। लेकिन पेपर लीक हो गया। अब राहुल का सपना अधर में लटक गया। ऐसे लाखों राहुल पूरे देश में हैं।
नीट जैसा एग्जाम एक बार का मौका नहीं होता। साल भर की तैयारी, लाखों रुपये खर्च, परिवार की उम्मीदें। और फिर एक गैंग पैसे के लालच में पेपर बेच देता है। बिहार-झारखंड में पहले भी ऐसे मामले आए हैं। अब पूरे देश में गुस्सा फूट पड़ा है। छात्र कह रहे हैं – “हमारी जिंदगी से खेला गया है।”
जंतर-मंतर का माहौल
यहाँ बैठे छात्रों में से ज्यादातर छोटे शहरों और गाँवों से आए हैं। दिल्ली की महंगाई में टेंट लगाकर सो रहे हैं। खाने के लिए भी संघर्ष। एक छात्रा ने नाम न बताने की शर्त पर बताया, दीदी, हम 18-19 घंटे पढ़ते थे। मम्मी कहती थीं बेटी डॉक्टर बन जा। अब क्या जवाब दूँ? उसकी आँखें नम हो गईं।

सीजेपी के नेतृत्व में छात्रों ने साफ माँग रखी है – शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, पेपर लीक की CBI जाँच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा। उन्होंने सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। कहा – अगर बात करनी है तो खुद जंतर-मंतर आओ।
सरकार की तरफ से अपील
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने छात्रों से विनम्र अपील की। उन्होंने कहा, “हम चार बार बातचीत का प्रस्ताव दे चुके हैं। स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और मैं खुद बैठने को तैयार हूँ। चर्चा से ही रास्ता निकलेगा। पीएम मोदी युवाओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। दोषी पाए गए किसी को भी नहीं बख्शा जाएगा।”

जितेंद्र सिंह ने आगे कहा, आंदोलन के अलावा दूसरे मुद्दों पर भी हम चर्चा करने को तैयार हैं। छात्र जितना समय चाहें, हम देंगे। ये हमारी प्रतिष्ठा का सवाल नहीं है। हम छात्रों के भविष्य के साथ खड़े हैं।
लेकिन छात्र मानने को तैयार नहीं। उनका कहना है कि पहले जवाबदेही तय हो, फिर बातचीत। “बार-बार बातचीत का न्योता देते हैं लेकिन असली मसले पर चुप्पी साध लेते हैं, एक छात्र ने गुस्से में कहा।
पेपर लीक का सिस्टमिक फेलियर?
नीट पेपर लीक कोई पहली बार नहीं हुआ। पिछले कुछ सालों में कई राज्यों में ऐसे मामले सामने आए। ग्रेस मार्किंग विवाद, ओएमआर शीट गड़बड़ी, पेपर बाहर आने की खबरें… हर बार छात्रों को ही परेशानी झेलनी पड़ती है। मेडिकल सीटें सीमित हैं। एक पेपर लीक पूरे साल की मेहनत को बर्बाद कर देता है।
छात्रों का आरोप है कि शिक्षा माफिया बहुत मजबूत है। पैसे के खेल में बड़े-बड़े लोग शामिल हैं। गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। जो कोचिंग का महंगा खर्चा नहीं उठा सकते, वे तो और भी मजबूर हैं।
छात्रों के पक्ष में क्यों जरूरी है तुरंत समाधान
ये सिर्फ एक एग्जाम नहीं है। ये लाखों युवाओं का भविष्य है। डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले बच्चे अगर निराश हो गए तो देश का भविष्य क्या होगा? स्वास्थ्य व्यवस्था कैसे सुधरेगी?
स्थानीय स्तर पर देखें तो बिहार, यूपी, राजस्थान, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में छात्र सबसे ज्यादा परेशान हैं। गाँव-कस्बों में माहौल खराब है। माता-पिता चिंतित हैं। कई छात्र डिप्रेशन में जा रहे हैं। कुछ तो पढ़ाई छोड़ने की बात कर रहे हैं।
सरकार को समझना चाहिए कि छात्र सिर्फ नौकरी या सीट नहीं माँग रहे। वे न्याय माँग रहे हैं। उनकी मेहनत का सम्मान माँग रहे हैं।
क्या होना चाहिए आगे?
- पेपर लीक की निष्पक्ष CBI जाँच हो और रिपोर्ट समयबद्ध तरीके से आए।
- दोषी चाहे कोई भी हो, सख्त सजा मिले।
- प्रभावित छात्रों के लिए नया एग्जाम या उचित मुआवजा।
- NTA (National Testing Agency) में बड़े सुधार।
- शिक्षा मंत्री स्तर पर जवाबदेही तय हो।
जितेंद्र सिंह की अपील सकारात्मक है। सरकार बातचीत के लिए तैयार है, ये अच्छी बात है। लेकिन छात्रों का गुस्सा भी जायज है। अब दोनों पक्षों को समझदारी दिखानी होगी। छात्रों को भी हिंसा से बचना चाहिए और सरकार को भी सिर्फ अपील नहीं, ठोस कदम उठाने चाहिए।
छात्रों की आवाज
एक छात्र ने माइक पर चिल्लाकर कहा – “हम रातों की नींद हराम करके पढ़े। हमारे माँ-बाप ने चावल-दाल कमाकर हमें पढ़ाया। अब एक लीक ने सब बर्बाद कर दिया। हम चुप नहीं बैठेंगे।”
जंतर-मंतर पर हर उम्र के लोग दिख रहे हैं। कुछ रिटायर्ड टीचर भी छात्रों के समर्थन में आए हैं। सोशल मीडिया पर #NEETLeak और #JusticeForStudents ट्रेंड कर रहा है। पूरी देश की नजर इस आंदोलन पर है।

छात्रों का ये संघर्ष सिर्फ अपनी सीट के लिए नहीं, पूरे सिस्टम की सफाई के लिए है। अगर आज न्याय नहीं मिला तो कल और ज्यादा बच्चे हताश होंगे। सरकार को चाहिए कि वो छात्रों की भावनाओं को समझे। जितेंद्र सिंह की अपील को आगे बढ़ाते हुए ठोस वार्ता हो और जल्द समाधान निकले।
राहुल जैसे लाखों छात्र आज उम्मीद की किरण देख रहे हैं। उन्हें निराश नहीं किया जा सकता। शिक्षा का अधिकार हर बच्चे का है। पेपर लीक जैसे गुनाह को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
सरकार और छात्र – दोनों को एक-दूसरे की बात सुननी होगी। लेकिन सबसे पहले छात्रों का भविष्य सुरक्षित होना चाहिए। क्योंकि ये देश का भविष्य है।
